[varanasi] - ‘मरीज के पास डॉक्टर जाएंगे... भूंजा पर्याप्त है या नहीं’

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वाराणसी। ‘मरीज के पास डॉक्टर जाएंगे... डॉक्टर नौ नंबर की चप्पल पहनते हैं... वीआईपी ने पूछा है कि भूंजा पर्याप्त है या नहीं...।’ जरायम जगत के कुख्यात नाम रहे मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पुलिस को चकमा देने के लिए फोन और मोबाइल पर बातचीत के दौरान ऐसे ही कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था। हालांकि बदलते दौर के साथ हाईटेक हुई पुलिस और एसटीएफ ने बजरंगी गिरोह के कोड वर्ड को डिकोड कर लिया था और बदमाशों की कारस्तानी पकड़ में आ जाती थी।

बागपत जेल में मारा गया मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पुलिस के सर्विलांस को चकमा देने में माहिर था। वर्ष 2000 से 2009 के बीच पुलिस और एसटीएफ के हाथोें मुठभेड़ में बजरंगी गिरोह के कई गुर्गे मारे गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार इससे घबराए बजरंगी ने मुंबई अंडरवर्ल्ड की तरह मोबाइल और टेलीफोन पर अपराध से जुड़ी बातचीत के लिए कुछ शब्द निर्धारित कर दिए थे। गुर्गे जब भी बजरंगी या गिरोह के अन्य सदस्यों से बातचीत करते तो उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करते थेे। पुलिस के अनुसार बजरंगी को उसके गिरोह के सदस्य वीआईपी और भाईजान कहते थे। 9 एमएम की पिस्टल को नौ नंबर की चप्पल, रिवाल्वर के लिए भिंडी, कारतूस के लिए भूंजा या दाना और शूटर के लिए डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं, जिसकी हत्या करनी होती थी या रंगदारी वसूलनी होती थी उसे मरीज कहा जाता था। इसी तरह वर्ष 2005 में सेंट्रल जेल की बैरक में मारा गया बजरंगी गिरोह के खास शार्प शूटर अन्नू त्रिपाठी को दुस्साहसिक वारदातों के लिए यमराज कहा जाता था। पुलिस का सर्विलांस जब और सक्रिय हुआ तो बजरंगी गिरोह की चालाकियां पकड़ में आने लगीं और गुर्गोें पर तेजी से शिकंजा कसा जाने लगा।

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