[allahabad] - हार्दिकता, करुणा के कवि हैं बद्री नरायण

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संस्था बैकस्टेज के ‘शब्द पर्व’ के तहत रविवार को कवि बद्री नारायण ने एकल काव्य पाठ किया। गहरी मार्मिक संवेदना और सामाजिक राजनीतिक चेतना से लैस कविताएं सुनाते हुए वह समय और समाज की नब्ज टटोलते रहे। प्रतिरोध के स्वर मुखर करते बद्री नारायण ने आरंभ से लेकर अब तक की अनेक चुनिंदा कविताएं सुनाईं।

इस दौरान उन्होंने काव्य पाठ पर तीन बार विराम लगाने की कोशिश की पर महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के विस्तार केंद्र के सत्यप्रकाश मिश्र सभागार में जुटे रचनाप्रेमियों ने उनसे फिर-फिर आग्रह करते हुए कविताएं सुनीं। इस विस्तार में ‘बैठे हैं हम, गोल में पहाड़ पर, प्रलय केदिनों में सप्तर्षि, मछली और मनु, सब वेद बचाएंगे, कोई नहीं बचाएगा प्रेमपत्र’ जैसी अनेक कविताएं शामिल रहीं।...

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