[dindori] - नियम विरूद्ध संचालित हो रहे निजी स्कूल

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डिंडोरी। जिले में संचालित निजी शालाओं को नियम विरूद्ध तरीके से मान्यता प्रदान कर दी गई है। जिसके चलते संचालक द्वारा मनमाने तरीके से शालाओं का संचालन किया जा रहा है। आलम यह है कि शालाओं में विद्यार्थियों को दर्ज तो कर लिया गया है, लेकिन उन्हे कितनी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। यह शालाओं में देखने मिल जायेगी। वहीं भर्ती के पूर्व संस्था संचालकों द्वारा अनेकों माध्यम से पालकों को लुभाने और योग्य शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य कराने का डंका पीटा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसका उदाहरण बरगांव में संचालित एक पब्लिक स्कूल में देखने को मिला। जहां केजी-वन से आठवीं तक की कक्षायें संचालित हैं। कक्षाओं के संचालन के लिए महज कुछ ही कमरे हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के साथ संख्या भी कक्षाओं के मुताबिक कम है। इसके अलावा संस्था मुख्य मार्ग के किनारे स्थित होने से विद्यार्थियों के सिर में खतरा मंडरा रहा है। इस मार्ग से लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। शाला के मुख्य द्वार में गेट तक नहीं लगाया गया है। जिससे अनहोनी का अंदेशा बना हुआ है। संस्था में तमाम प्रकार के विसंगतियों के बावजूद भी प्रशासन द्वारा शाला को मान्यता प्रदान कर दिया गया है। वहीं संस्था प्रमुख अपनी संस्था की मान्यता के संबंध में बताया कि पिछले पांच वर्षों से नजदीकी ग्राम सागर टोला में शाला का संचालन कर रहे थे, जिसके मद्देनजर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मान्यता प्रदान कर दी गई है। वहीं इस संबंध में विकासखंड स्त्रोत समन्वयक ब्रजभान सिंह गौतम द्वारा बेतुका जवाब दिया जा रहा है और संस्था प्रमुख को तीन दिन पूर्व नोटिस जारी कर गेट लगवाने की बात कह रहे हैं। जबकि मान्यता के संबंधी कार्रवाई के दौरान विकासखंड स्त्रोत समन्वयक द्वारा मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है। इसके बाद भी मान्यता प्रदान की जाती है। कुल मिलाकर संचालित शाला में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तो किया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा को लेकर भी लापरवाही बरती जा रही है। इसके अलावा अनेकों निजी शालाएं संचालित हैं, जिन्हे भी नियमों के विरूद्ध मान्यता प्रदान कर दी गई है। मान्यता देने में जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

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