[jaipur] - साल में एक बार आता है ये दिन, 24 एकादशी व्रत के बराबर मिलता है पुण्य

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जयपुर। प्रत्येक वर्ष आने वाली 24 एकादशी व्रतों में से निर्जला एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भगवान विष्णु को प्रश्न करने के लिए लोग निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं। यदि आपको भी भगवान विष्णु को खुश करना है, तो निर्जला एकादशी का व्रत करें। इस व्रत को करने से पहले ये भी जान लें कि व्रत करने के पीछे कितनी कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। व्रत के दौरान पानी तक नहीं पी सकते। वहीं अगले दिन पानी-भोजन ग्रहण कर व्रत तोड़ा जाता है। व्रत में केवल कुल्ला करने के लिए मुख में जल ले सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि गलती से भी जल का सेवन कर लिया तो व्रत खंडित हो जाएगा। निर्जला एकादशी के व्रत के दौरान सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता है, यहां तक व्रत में भोजन का भी त्याग करना होता है। इस बार ये पर्व 23 जून को मनाया जाएगा। इस पर्व को भीम सेन एकादशी या निर्जला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

भीम सेन ने रखा था ये व्रत

निर्जला एकादशी का व्रत भीम सेन ने भी रखा था। शास्त्रों की मानें तो इस व्रत को रखकर सभी एकादशियों का लाभ कमाया जा सकता है। दरअसल, पाण्डवों में भीम सेन ने महर्षि व्यास से कहा कि युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव व द्रौपदी प्रत्येक वर्ष एकादशी के व्रत करते हैं। लेकिन भूख बर्दाशत नहीं होने के कारण मुझसे ये व्रत नहीं हो पाते। महर्षि व्यास ने भीम सेन को सभी एकादशी के व्रत करने के बजाए निर्जला एकादशी का व्रत रखने का उपाय बताया था। निर्जला एकादशी का व्रत कर भीम ने सभी एकादशी के व्रतों का लाभ कमाया था।

दान पूण्य कर भगवान को करें प्रश्न

इस व्रत के दौरान "ओम नम् भगवते वासुदेवाय" का जाप करते रहना चाहिए। व्रत में सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक जल और भोजन का ग्रहण नहीं करें। व्रत के दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करें। वहीं कलश को शुद्ध जल से भरकर सफेद कपड़े से ढक दें। इसके साथ दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान करें। दरअसल, व्रत के दौरान दान-पुण्य करने का शास्त्रों में विशेष महत्व माना गया है। दान पुण्य करने से भगवान जल्द खुश होते हैं।

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