[nagaur] - पहले दिखाए घर के सपने अब दे रहे वसूली के लिए नोटिस

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लाडनूं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयन कर लोगों को पहले तो घर के सपने दिखाए जा रहे हैं बाद में उन्हें वसूली को नोटिए थमाए जा रहे हैं। ऐसा ही मामला गांव बेड में सामने आया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 के अन्तर्गत गांव बेड निवासी हरिदास, बालदास व हुक्मदास का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवाने के लिए चयन किया गया था। चयन होने के बाद इनको प्रथम किस्त भी जारी कर दी गई थी। प्रथम किस्त के रूप में 30 हजार रुपए की राशि मिलने पर इन्होंने मकान बनवाने के लिए काम भी शुरू करवा दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही ग्रामसेवक (पदेन सचिव) की ओर से गलत आवास स्वीकृति राशि की वसूली को लेकर तीनों को नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस पाकर तीनों के होश उड़ गए। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अब तीनों को ही राशि चुकाने की चिंता सताए जा रही है। वहीं तीनों का आशियाने का सपना भी टूटता हुआ नजर आ रहा है। गौरतलब बात तो ये है कि चयन के समय इन तीनों ही व्यक्तियों के दस्तावेज गलत थे तो इनका चयन कैसे हो गया।नोटिस में दे रहे ये हवालाग्राम पंचायत दूजार के ग्रामसेवक (पदेन सचिव) की ओर से जारी किए गए नोटिस में बताया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गलत दस्तावेज पेश किए गए हैं। इस वजह से आपके नाम योजना में अपात्र होते हुए भी स्वीकृति जारी हो गई। प्रथम किस्त के रूप में 30 हजार रुपए खाते में जमा कर दिए गए। इसलिए उपरोक्त राशि 30 हजार रुपए पंचायत कार्यालय में जमा करवाए जाए।

पीडि़तों का ये कहना

चयनित तीनों ही पीडि़तों का कहना है कि स्थानीय राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण वसूली नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में अधिक जमीन बताकर अपात्र दिखाया गया है। हमारी सामलाती खातेदारी जमीन 93 बीघा है, लेकिन इस जमीन में 13 हिस्सेदार है। प्रत्येक हिस्सेदार के हिस्से में 7.15 बीघा जमीन आती है। जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रता के अनुकूल है। वहीं जो ट्यूबवैल है वह भी भाई छोटूदास व पिता तुलसीदास के हिस्से में आता है। कोई पक्का मकान भी उनके नहीं है। इसके बावजूद उनको अपात्र घोषित कर वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया। हुक्मदास ने रुके हुए मकानों के कार्य को शुरू करवाने व बाकि की किस्त दिलवाने की मांग को लेकर जिला परिषद के सीईओ को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में उन्होंने यदि उनके दस्तावेज में किसी तरह की कमी है या गलत तथ्य पेश किए गए हैं तो किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच करवाने की मांग भी की है।

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