[sikar] - राजस्थान में यहां पर पुलिस व नेता के बेटे ने जो कांड किया उससे कई घर हो गए बर्बाद

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सीकर. शेखावाटी में जड़ें जमा रहे सूदखोरी के अवैध कारोबार को लेकर पत्रिका ने अभियान की शुरुआत की है। हमारा प्रयास सूदखोरों से प्रताडि़त लोगों का दर्द जनता के सामने लाने का है।

सूदखोरी के बढ़ते दायरे में पुलिस के कर्मचारियों की संलिप्पता भी सामने आ चुकी है। कुछ दिनों पहले एक मामले में एक पुलिस कांस्टेबल ने पीडि़त पक्ष को सूदखोरी के दो लाख रुपए नहीं लौटाने पर प्रताडि़त करने की धमकी दी थी।

सीकर में एक बार स्थिति ऐसी भी बनी कि एक पूर्व विधायक का बेटा सूदखोरी के कारण लापता हो गया था, लेकिन पुलिस जांच में दोनों ही प्रकरण ऐसे गोलमाल हुए कि सूदखोरी के बाकी पीडि़तों ने भी थानों में चक्कर काटना छोड़ दिया। इसमें फंसे पीडि़तों को सौ रुपए पर प्रतिमाह 30 फीसदी तक ब्याज चुकाना पड़ रहा है।

झुंझुनूं से बुलाया था कांस्टेबल को

पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए परिवाद में पीडि़त प्रखर कुमार ने सूदखोरी से जुड़े कांस्टेबल का नाम उजागर किया था। झुंझुनूं पदस्थापित इस कांस्टेबल की करतूत बताते हुए प्रखर ने आरोप लगाए थे कि 10 रुपए सैकड़ा से ब्याज व मूल रकम चुकाने के बावजूद जब बाकी के 40 हजार रुपए बचे तो सूदखोरों ने उसके खाली चेक पर दो लाख रुपए की रकम भर बाउंस करवा दिया।

पीडि़त पर दबाव बनाने के लिए उसी के खिलाफ कोर्ट में चेक अनादरण का मुकदमा दर्ज करा दिया था। इसके बाद प्रेशर में लाने के लिए झुंझुनूं से एक कांस्टेबल को बुलाया गया। जिसने पीडि़त को सूदखोरी के दो लाख रुपए नहीं देने पर पुलिस की प्रताडना झेलने की धमकी दी बताई। बाद में पुलिस की जांच शुरू तो हुई, लेकिन परिवादी को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है।

डेढ़ करोड़ के बाद भी छोडऩा पड़ा घर

पिछले साल ही एक पूर्व विधायक का बेटा सूदखोरी में डेढ़ करोड़ गंवाने के बाद घर से लापता हो गया था। पूर्व विधायक ने पुलिस अधीक्षक को सूदखोरों के खिलाफ परिवाद देकर आरोप लगाए थे कि उसके बेटे से तीन से 30 रुपए सैकड़ा ब्याज लगाकर उससे डेढ़ करोड़ रुपए अतिरिक्त वसूल लिए हैं। इसके बाद भी सूद का पैसा पूरा नहीं होने पर वह बिना बताए ही घर से लापता हो गया था। मामला गर्माने पर पुलिस ने सूदखोरों के ठिकानों पर छापे भी मारे थे। लेकिन, शातिर हाथ नहीं लगे।

200 मुकदमे दर्ज

पिछले डेढ़-दो साल में जिले के पुलिस थानों में करीब दो सौ मुकदमे व परिवाद दर्ज हो चुके हैं। सीकर कोतवाली व अकेले उद्योग नगर थाने में 50 से अधिक मुकदमे सूदखोरी के दर्ज करवाए गए थे।

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