[udaipur] - मां अपने बच्चों से बोली, मुझे कुछ हो जाए तो मामा के घर चले जाना...और फिर उठाया ये खौफनाक कदम...जानें पूरा मामला

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भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . पति मिर्गी की बीमारी से पीडि़त, ऐसे में दो बच्चों को पालना और परिवार को चलाने की जिम्मेदारियों के बीच नौकरी संकट में आने से वह अवसाद में आ गई। तनाव इतना बढ़ गया कि उसने खुद को खत्म करने का मन बना लिया। शुक्र है कि उसकी जान बच गई। यह आपबीती है सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के एक विभाग में कार्यरत महिलाकर्मी की। विश्वविद्यालयमें चल रही भर्ती में जिम्मेदारों की कारगुजारियां अब लोगों की जान पर बन आई है।

विवि के एक विभाग में करीब दस वर्षों से कार्यरत महिला कर्मी का नाम सहायक कर्मचारी की चयन सूची में नहीं आने से वह अवसाद में आ गई और उसने 19 जून की शाम विषाक्त सेवन कर लिया। वह अब भी खतरे से बाहर नहीं आ पाई है। उसका एमबी चिकित्सालय में उपचार चल रहा है।पीडि़ता के भाई जोधपुर निवासी अमरसिंह तंवर ने बताया कि हालांकि उसने अपने मुंह से कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी करीबी साथी ने बताया कि 19 जून को सुखाडिय़ा विवि ने सहायक कर्मचारियों के 15 अभ्यर्थियों की एक सूची निकाली जिसमें उसका नाम शामिल नहीं था। ऐसे में अवसाद में आकर उसने यह कदम उठाया है। इससे पहले उसने बच्चों से ये भी कहा था कि यदि मुझे कुछ हो जाए तो मामा के घर चले जाना...। पीडि़ता के भाई ने बताया कि उनकी बहन के पति को मिर्गी के दौरे आते हैं। ऐसे में एक बेटा और बेटी को पालने की जिम्मेदारी उसकी बहन पर है। ऐसे में अचानक नौकरी नहीं रहना या नियमित नौकरी नहीं होने की बात सुन वह अवसाद में चली गई थी।

विवि ने उसी दिन निकाली थी सूचीविवि ने 19 जून को ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व सफाई कर्मचारी के पद के लिए 15 सफल अभ्यर्थियों की सूची निकाली है, जिसके लिए 16 जनवरी को दक्षता परीक्षा हुई थी। इस पद के लिए गुरुवार को दस्तावेज सत्यापन हुआ।

अधिकरी-कर्मचारी भी मिलने पहुंचे हॉस्पिटल में पीडि़ता से मिलने विवि के कुछ कर्मी व अधिकारी पहुंचे। बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने इनमें से कुछ को उसकी हालत जानने और बाद में मौका मिलने पर नौकरी देने की बात कहने के लिए भेजा था।

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