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अजमेर

प्रदेश के सरकारी कॉलेज में शिक्षकों के तबादले हो सकते हैं। इस सत्र से खुलने वाले नए और पुराने कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद खाली हैं। इसके अलावा कई कॉलेज में प्राचार्य और उपाचार्य भी नहीं हैं। उच्च शिक्षा विभाग जल्द शिक्षकों के तबादले करेगा।

उच्च शिक्षा विभाग के अधीन राज्य में 230 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से 40 प्रतिशत से ज्यादा कॉलेज में स्थाई प्राचार्य या उपाचार्य पद खाली हैं। इसके अलावा प्रदेश में सत्र 2018-19 से कई नए कॉलेज खुलेंगे। पुराने कॉलेज में भी विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है। प्रदेश के बड़े स्नातकोत्तर और स्नातक कॉलेज में शिक्षकों का जमावड़ा ज्यादा है। ऐसे में विभाग शिक्षकों और प्राचार्यों-उपाचार्यों की कुर्सियां हिला सकता है। मालूम हो कि लम्बे अर्से से वरिष्ठ व्याख्याताओं की डीपीसी भी नहीं हुई है।

जीसीए भी जुलाई-अगस्त में खालीसंभाग और राज्य का सबसे पुराने सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के हाल भी खराब हैं। यहां उपाचार्यों के दो पद करीब सात महीने से रिक्त हैं। प्राचार्य डॉ. एस. के. देव जुलाई और एकमात्र उपाचार्य डॉ. पी. सी. सेठी इनके बाद सेवनिवृत्त होंगे। इनके बाद कॉलेज कौन संभालेगा फिलहाल तय नहीं है।

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प्री.बीएड परीक्षा होगी या नहीं...

मौजूदा वक्त राजस्थान में करीब 850 से ज्यादा निजी और सरकारी बीएड कॉलेज हैं। इनमें दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीए/बीएससी बीएड कोर्स संचालित हैं। इन बीएड पाठ्यक्रमों में दाखिलों के लिए सरकार प्रतिवर्ष प्री.टीचर एज्यूकेशन टेस्ट का आयोजन करती है। पिछले 20 साल में इसकी जिम्मेदारी विभिन्न विश्वविद्यालयों को मिलती रही है। प्री. बीएड परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अंकों और मेरिट के अनुरूप ऑनलाइन काउंसलिंग के आधार पर कॉलेज में प्रवेश मिलते हैं। चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ तो प्री. बीएड परीक्षा को लेकर सरकार को नए सिरे से विचार करना पड़ेगा।

सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा....सरकार बीएड कोर्स को एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की तरह बनाना चाहती है। मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में सेमेस्टर पद्धति लागू है। विद्यार्थियों को सेमेस्टर परीक्षाओं में देरी तो कभी परिणाम को लेकर परेशानियां उठानी पड़ती हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की डिग्री चार के बजाय पांच साल में पूरी होती है। उधर दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीएससी/बीएड कोर्स में वार्षिक परीक्षा योजना लागू है। विद्यार्थी दो अथवा चार साल की अवधि में कोर्स पूरा कर लेते हैं। लिहाजा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को बीएड में सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षा स्कीम लागू करने के लिए भी योजना बनानी होगी।

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