[ajmer] - खास राज छुपा है इन भारतीय नृत्यों में, नहीं पहचान पाए लोग इनकी खूबियों को

  |   Ajmernews

अजमेर

शास्त्रीय नृत्यों से सजी सांझ ने दर्शकों प्राचीन विरासत से रूबरू कराया। मुगलकालीन आनासागर बारादरी पर कलाकारों ने ओडिशी और कथक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन के तहत आयोजित नीर उत्सव ने लोगों को नृत्यांजलि के माध्यम से जल संरक्षण की सीख दी गई।

दिल्ली के हिमांशु कुमार ने मरुधरा पर सुदूर ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने जटाशंकर गंगावतरण...गीत पर सुंदर नृत्य किया। नृत्य में भगवान शंकर की जटाओं से धरती पर गंगा के अवतरण और प्राकृतिक वातावरण को बताया गया।

जयपुर घराने की मनस्विनी शर्मा ने एकल कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने तीन ताल पर आधारित नृत्य किया तो दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह वद्र्धन किया। संगीत के साथ पैरों की थिरकन आकर्षक रही। लखनऊ के देवेंद्र शर्मा ने भी कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया।

जयपुर घराने के अभिषेक शर्मा और देवनंदनी सोलंकी ने शुद्ध कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने कथक में ध्रुत-लय के तोड़े पेश किए। इस दौरान गोपाल बंजारा और कलाकारों ने जल संरक्षण पर आधारित जिंदगी मौत न बन जाओ संभालो पानी...गीत पेश किया। समारोह में जिला कलक्टर आरती डोगरा, अजमेर रेंज की आईजी मालिनी अग्रवाल सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। संचालन डॉ. पूनम पांडे ने किया।

तय नहीं दाखिलों का फार्मूला

चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम में दाखिलों का फार्मूला तय नहीं हुआ है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 2019-20 से कोर्स प्रारंभ करने की बात कही है। बीएड कॉलेज में बारहवीं पास विद्यार्थियों को किस फार्मूले से प्रवेश मिलेंगे इसका खुलासा नहीं किया गया है। जबकि सामान्य कॉलेजों में बीए, बी.कॉम, बीएससी प्रथम वर्ष के कोर्स में विद्यार्थियों को सीधे दाखिले मिलते हैं।

प्री.बीएड परीक्षा होगी या नहीं...मौजूदा वक्त राजस्थान में करीब 850 से ज्यादा निजी और सरकारी बीएड कॉलेज हैं। इनमें दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीए/बीएससी बीएड कोर्स संचालित हैं। इन बीएड पाठ्यक्रमों में दाखिलों के लिए सरकार प्रतिवर्ष प्री.टीचर एज्यूकेशन टेस्ट का आयोजन करती है। पिछले 20 साल में इसकी जिम्मेदारी विभिन्न विश्वविद्यालयों को मिलती रही है। प्री. बीएड परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अंकों और मेरिट के अनुरूप ऑनलाइन काउंसलिंग के आधार पर कॉलेज में प्रवेश मिलते हैं। चार वर्षीय एकीकृत टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ तो प्री. बीएड परीक्षा को लेकर सरकार को नए सिरे से विचार करना पड़ेगा।

सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा....

सरकार बीएड कोर्स को एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की तरह बनाना चाहती है। मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में सेमेस्टर पद्धति लागू है। विद्यार्थियों को सेमेस्टर परीक्षाओं में देरी तो कभी परिणाम को लेकर परेशानियां उठानी पड़ती हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की डिग्री चार के बजाय पांच साल में पूरी होती है। उधर दो वर्षीय बीएड और चार वर्षीय बीएससी/बीएड कोर्स में वार्षिक परीक्षा योजना लागू है। विद्यार्थी दो अथवा चार साल की अवधि में कोर्स पूरा कर लेते हैं। लिहाजा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को बीएड में सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षा स्कीम लागू करने के लिए भी योजना बनानी होगी।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/7EUtwgAA

📲 Get Ajmer News on Whatsapp 💬