[allahabad] - एनटीपीसी के मजूदर की मौत, चक्काजाम

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बदमाशों की पिटाई से जख्मी एनटीपीसी के मजदूर की शुक्रवार की शाम मौत हो गई। जब कि साथी अस्पताल में भर्ती है। बृहस्पतिवार की रात कंपनी से घर लौटते समय बदमाशों ने छिनैती करने के बाद बेरहमी से पीट दिया था। मजदूर की मौत के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव को सड़क पर चक्काजाम कर दिया। मुआवजे के साथ पत्नी को नौकरी, बच्चों की पढ़ाई पर अडे़ परिजनों को एसडीएम व सीओ ने समझाकर शांत कराया। इस दौरान दो घंटे सड़क पर हंगामा चलता रहा।

शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के बैशन का पुरवा गांव निवासी श्रीराज (32) पुत्र जमुना प्रसाद प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड बारा में मजदूरी करता था। बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार की करीब नौ बजे वह कंपनी से साथी श्याम बिहारी के साथ घर लौट रहा था। रैपटना गांव के समीप पहले से घात लगाकर बैठे बदमाशों ने मजदूरों की पिटाई करते हुए 25 हजार नगदी व मोबाइल छीनकर भाग निकले। घटना की जानकारी होते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और घायल मजदूरों को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार की शाम मजदूर श्रीराज की इलाज के दौरान मौत हो गई। जब कि साथी श्याम बिहारी अस्पताल में भर्ती है। शुक्रवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर गांव पहुंचे। मजदूर की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पावर प्लांट के सामने बांदा मार्ग पर शव रख परिजनों ने चक्काजाम कर दिया।

बवाल की सूचना मिलते ही एसडीएम, सीओ पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। परिजन 10 लाख रुपये मुआवजे के साथ पत्नी अनीता को नौकरी, बेटे सौरभ व शुभम को नि:शुल्क शिक्षा दिलाए जाने की मांग पर अड़ गए। अफसरों ने उग्र लोगों को किसी तरह समझाते हुए शांत कराया। एसडीएम बारा दयाशंकर पाठक ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक परिजन व ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान करीब तीन घंटे यातायात बाधित रहा। मजदूर की मौत की परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है।

बैशन का पुरवा गांव के मजदूर श्रीराज की मौत के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गरम है। चर्चा है कि युवक कंपनी के एक ठेकेदार के साथ काम करता था। इस दौरान वह यूनियन बाजी भी करने लगा था। जिसे लेकर कुछ लोग उससे नाराज चल रहे थे। श्रीराज पर हमला कहीं नेतागीरी के चक्कर में तो नहीं किया गया है। हालांकि इस बावत परिजन अभी खामोशी अख्तियार किए हुए हैं।

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