[almora] - जेनरेटर लगाकर खेतों में पानी पहुंचा रहे काश्तकार

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सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सोमश्वर घाटी क्षेत्र धान की फसल के लिए प्रसिद्ध है। इन दिनों धान की रोपाई शुरू हो गई है, लेकिन नहरों और हेड क्षतिग्रस्त होने से खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। काश्तकार कोसी और साईं नदी के किनारे जेनरेटर लगाकर पाइपों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचकार धान की रोपाई कर रहे हैं। सोमेश्वर घाटी क्षेत्र के गांवों में धान और आलू का बहुतायत में उत्पादन होता है। काश्तकारों की आजीविका का मुख्य साधन भी खेती ही है। घाटी क्षेत्र की भूमि सिंचित है, लेकिन कोसी और साईं नदी से बनाई गई नहरें और हेड क्षतिग्रस्त पड़े हैं। जिस कारण नहरों के जरिए खेतों में पानी पहुंचाना काश्तकारों के लिए संभव नहीं हो पा रहा है।पिछले दिनों हुई बारिश के दौरान काश्तकारों ने खेतों के कुछ हिस्से में धान की रोपाई की थी, लेकिन अब नहरें और हेड टूटे पड़े हैं। इन्हें सिंचाई विभाग ठीक नहीं करा रहा है। इससे काश्तकारों में रोष है। सक्षम काश्तकार कोसी और साईं में जेनरेटर लगाकर पाइपों के जरिए किसी तरह खेतों में पानी पहुंचकर रोपाई कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर काश्तकार धान की रोपाई के लिए बारिश के इंतजार में हैं।नहरों को ठीक करने के लिए संबंधित विभाग ध्यान नहीं दे रहे हैं। नदियों से जेनरेटर के द्वारा पानी खेतों तक पहुंचाना मजबूरी हो गया है। पानी के अभाव में फसल उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ता है।चंपा देवी, ग्राम पंचायत मल्ला खोली।

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