[alwar] - रेलवे फाटक बंद होने के बाद बढ़ गया लोगों की जान को खतरा, इस तरह जोखिम उठा रहे लोग

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अलवर.काली मोरी रेलवे फाटक बंद होते ही रेलवे स्टेशन से ईटाराणा पुलिया तक पांच नए रास्ते बन गए। इन रास्तों से प्रतिदिन सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पार करते हैं। ऐसे में हादसों की संख्या बढ़ रही है। इस तरफ रेलवे प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। वहीं लोग भी अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। काली मोरी रेलवे फाटक से दूसरी तरफ एक दर्जन कॉलोनियों में करीब डेढ़ लाख लोग रहते हैं।

रेलवे फाटक बंद होते ही इन लोगों को आने जाने में खासी परेशानी हो रही है। ओवर ब्रिज दूर पड़ता है व उस पर आए दिन हादसे होते हैं। ऐसे में लोग उस पर जाने से बचते हैं। इस स्थिति में लोगों ने पांच नए रास्ते बना लिए हैं। काली मोरी आईटीआई के बच्चे बस व टैम्पो के लिए दिनभर रेलवे ट्रैक पार करके ईटाराणा ओवर ब्रिज के नीचे आते हैं व आईटीआई की तरफ जाते हैं। कुछ दूरी पर विद्युत निगम के कार्यालय के सामने कर्मचारियों ने रास्ता बना लिया है।

निगम के वाहन भी रेलवे ट्रैक के दूसरी तरफ खड़े रहते हैं। दिनभर कर्मचारी व लोगों की लाइन लगी रहती है। काली मोरी रेलवे फाटक पर दिनभर महिला व बच्चे रेलवे ट्रैक पार करते हैं। कुछ दूरी पर काली मोरी रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे से युवा बाइक व साइकिल से रेलवे ट्रैक करते रहते हैं। ऐसे में खासा समय लगता है। कई बार बाइक रेलवे ट्रैक पर फंस जाती है। किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

अलवर जंक्शन से पहले भी दिनभर इसी तरह के हालात बने रहते हैं। लेकिन आरपीएफ व रेलवे प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। ट्रेन की चपेट में आने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अलवर रेलवे खण्ड में दो दिनों में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है।

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