[azamgarh] - निलंबन के बाद भी आफिस में कार्य करने का आरोप

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आजमगढ़। नेशनल हाईवे 233 से भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में अनियमितता में निलंबित अमीन पर अधिकारियों की मिलीभगत से आफिस में कार्य करने का आरोप लगाया गया है। भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ के क्षेत्र संयोजक ने मामले की शिकायत कमिश्नर से की है। कमिश्नर ने जिलाधिकारी से मामले में रिपोर्ट तलब की है। भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ के क्षेत्र संयोजक रमाकांत मिश्र ने कमिश्नर एसवीएस रंगाराव से शिकायत की कि वाराणसी-लुंबिनी हाईवे के निर्माण के लिए असाधारण गजट प्रकाशित किया गया था। गजट के बाद जमीन के खरीद-फरोख्त पर रोक लग जाती है। विभाग के अमीन योगेंद्र सिंह ने अपने और परिजनों के नाम पर जमीन खरीद कर करोड़ों का प्रतिकर प्राप्त कर लिया। शिकायत पर अमीन को निलंबित कर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन वो बहाल हो गया। मामले की जांच पहले भी एडीएम प्रशासन प्रेम प्रकाश सिंह ने की थी। दोषी भी पाया गया, लेकिन रिपोर्ट दबा दी गई। इसके बाद भीलमपुर छपरा में मृत व्यक्ति के नाम दूसरे को खड़ा कर 95 लाख का प्रतिकर जारी कर दिया गया। इसमें भी विभाग की मिलीभगत रही। जांच में अमीन योगेंद्र सिंह मिलीभगत मिलने पर इन्हें दोबारा निलंबित किया गया। इस प्रकरण में विभाग ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज करा खेल कर दिया। गलत फाइल बनाने में विभाग के साथ ही तहसील और ग्राम स्तर के कर्मचारी-अधिकारी दोषी थे, लेकिन उन्हें बचा लिया गया। आरोप लगाया कि योगेंद्र सिंह विभागीय मिलीभगत से निलंबन के बाद भी आफिस में कार्य कर रहे हैं। उन्हों ने मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है। कमिश्नर ने डीएम से मामले में रिपोर्ट तलब की है।

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