[banda] - एनजीटी में अवैध खनन की अंतिम सुनवाई 24 जुलाई को

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अमर उजाला ब्यूरो बांदा। जिले की केन और बागै नदियों में अवैध खनन के विरुद्ध नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर की गई याचिका पर पिछले डेढ़ वर्षों से चल रही सुनवाई अब निर्णायक दौर में आ गई है। आरोपियों और प्रशासन व पुलिस तथा अन्य संबंधित विभागों के अफसरों को तलब कर चुकी एनजीटी यूपी-एमपी के आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी कर चुकी है। अब एनजीटी ने इसकी अंतिम सुनवाई 24 जुलाई निर्धारित कर दी है। याचिका कर्ता सहित उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षकारों को आदेश दिया है कि दो हफ्ते के अंदर अपने जरूरी सभी कागजात एनजीटी को पेश करें। उदयपुर (बांदा) गांव निवासी ब्रजमोहन यादव ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एनजीटी में याचिका दायर करके कहा था कि बांदा की केन और बागै नदियों में अवैध खनन हो रहा है। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप लगाया था कि प्रशासन और संबंधित विभागों की सांठगांठ से नदियों में भारी-भरकम मशीनों को प्रयोग रहा है। जलधाराओं में अवैधानिक पुल बनाए गए हैं। बालू के ट्रक और वाहन निकालने के लिए किसानों के खेतों से जबरन रास्ते बना दिए गए हैं। पर्यावरण के साथ राजस्व की भी भारी क्षति हो रही है। बांदा डीएम और एसपी सहित छतरपुर के डीएम को भी पक्ष (पार्टी) बनाया था। डेढ़ साल की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने बांदा सहित सीमावर्ती मध्य प्रदेश के छतरपुर के अधिकारियों और आरोपियों को नोटिस जारी की। बालू के ट्रकों के गुजरने वाले रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश बांदा और फतेहपुर प्रशासन को दिए। एनजीटी ने अपनी टीम भेजकर केन और बागै नदियों में खनन स्थलों की जांच कराई। टीम ने अवैध खनन संबंधी साक्ष्य जुटाए और फोटोग्राफ लेकर एनजीटी में दाखिल किए। पिछले माह 16 मई को सुनवाई के दौरान एनजीटी के कार्यवाहक चेयरपर्सन न्यायमूर्ति जव्वाद रहीम और न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी तथा विशेषज्ञ सदस्य डा. नागिन नंदा ने सुनवाई के बाद इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 24 जुलाई 2018 निर्धारित कर दी है। सभी पक्षकारों को दो हप्ते के अंदर अपने अभिलेख पेश करने के आदेश दिए हैं। याचिका की पैरवी अधिवक्ता राहुल चौधरी और उत्कर्ष जैन कर रहे हैं। एनजीटी में अवैध खनन की अंतिम सुनवाई 24 जुलाई को डेढ़ वर्षों से याचिका पर एनजीटी कर रही है सुनवाई पक्षकारों को दो हफ्ते में अभिलेख पेश करने का आदेश सुनवाई के दौरान कई कार्रवाइयों कर चुकी है एनजीटी

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