[baran] - जर्जर स्कूलों में लगता है डर

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बारां. सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने व शैक्षणिक स्तर सुधारने के प्रयास तो भरपूर हो रहे हैं, लेकिन जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों की दशा सुधारने के जतन नहीं किए जा रहे।

जिले मेें प्रारंभिक शिक्षा के अधीन 970 सरकारी स्कूल हैं, जबकि माध्यमिक शिक्षा के अधीन 285 स्कूल संचालित हैं। जिले में प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा के अधीन करीब 200 सरकारी स्कूल क्षतिग्रस्त है। इनमें कई भवन 30 साल पुराने हैं, जिनकी दीवारों से प्लास्टर गिरता रहता है। बारिश में छतों से पानी टपकता है, ऐसे में छात्र-छात्राओं को मंदिर या बरामदे में पढऩा पड़ता है। ज्यादा बारिश व सर्दी में कई बार स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधीन 940 व माध्यमिक के अधीन 285 सरकारी स्कूल हैं। प्रारंभिक के अधीन मरम्मत योग्य करीब 160 भवन हैं। 25 से ज्यादा कक्षा-कक्ष जर्जर हंै। अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद से प्रतिवर्ष मरम्मत योग्य भवनों का प्रस्ताव मांगा जाता है। इस वर्ष 20 स्कूलों का प्रस्ताव मांगा गया था। स्कूलों का सर्वे कर रिपोर्ट बनाकर जयपुर भेज दी है। जुलाई में स्वीकृत होने की संभावना है। इसी तरह से माध्यमिक शिक्षा विभाग मरम्मत योग्य भवनों की संख्या 40 बताता है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अब तक प्रस्ताव नहीं मांगा है।

निकलते हैं सांप व बिच्छु कई स्कूलों का फर्श पूरी तरह से टूट गया है। साथ ही भवन की दीवारें छतिग्रस्त हैं। हालांकि कई स्कूलों में जर्जर कक्षा कक्षों में छात्र-छात्राओं को नहीं बैठाया जाता है लेकिन जमीन कच्ची व दीवारें जर्जर होने सांप व बिच्छु सहित अन्य जहरीले जानवर निकलते हैं, जिससे बच्चे डर जाते हैं। कई बार तो बच्चे स्कूल तक आना पसंद नहीं करते हंै। वर्जन मरम्मत योग्य भवनों का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता है। यदि सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हैं तो सर्वे कराकर रिपोर्ट राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजी जाएगी, जिससे निर्माण की स्वीकृति मिल सके। प्रहलाद राठौर, कार्यवाहक, डीईओ माध्यमिक,

बारां रिपोर्ट दिलीप वनवानी

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