[churu] - सारथी लगाएंगे रोडवेज का बेड़ा पार

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चूरू.

वर्ष दर वर्ष घाटे में डूबते और कर्मचारियों की कमी से जूझते रोडवेज का बेड़ा पार लगाने के लिए चूरू आगार ने एक बार फिर सारथी की तलाश शुरू की है। वर्ष 2016में लागू हुई रोडवेज की बस सारथी योजना नियमों की पेचीदगियों व कम कमीशन के चलते इससे पहले दो बार फ्लॉप हो चुकी है। रोडवेज अब दूसरी बार योजना में संशोधन कर इसे बस सारथी योजना २०१८ के नाम से लागू करने जा रहा है। आगार के अधिकारियों के मुताबिक चूरू डिपो में फिलहाल 41 परिचालकों की कमी चल रही है। इस वजह से बसों का संचालन सही तरीके से नहीं हो पाने से बसों की संख्या के मुताबिक राजस्व नहीं मिल पा रहा है। परिचालकों की कमी दूर करने के लिए रोडवेज सारथी नियुक्त करेगा। योजना के तहत आवेदन करने वालों को साक्षात्कार व लिखित अनुबंध के बाद तय रूट पर एक जुलाईसे संचालन के लिए बस सौंपी जाएंगी।

अब फायदे के रूट भी मिलेंगेपहले जहां योजना के तहत सारथी को केवल उसी रूट की बसें दी जाती थी। जो घाटे में चलती थी। मगर अब वे अपनी पसंद के मुताबिक अधिक राजस्व व फायदे वाले रूट भी ले सकेंगे। राजस्व बढ़ोतरी की सीमा भी पांच प्रतिशत कर दी गई है। जो पहले 10 प्रतिशत थी। यानि वर्तमान में मिल रहे राजस्व से पांच फीसदी अधिक देने पर भी सारथी को रूटदिया जा सकेगा। पहले आवेदक से अमानत राशि 15 हजार रुपए ली जा रही थी। मगर अब ईटीएम की राशि जोड़कर ४० हजार रुपए ली जाएगी।

छह माह में छह कर्मचारी सेवानिवृतआगार के अधिकारियों के मुताबिक आगार से हर महीने एक कर्मचारी सेवानिवृत हो रहे हैं। पिछले छह महीनों में छह कर्मचारी सेवानिवृत हो चुके हैं। मगर सरकार नईभर्तीकर पदों पर नियुक्ति नहीं कर रही है। ऐसे में कर्मचारियों पर न केवल काम को बोझ दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, बल्कि आगार भी घाटे में डूबता चला जा रहा है।

41 परिचालकों की कमीचूरू आगार में स्वीकृत 128 में से 28 पद रिक्त है। बाकी 1०० में से 13 कार्यालय में कार्यरत हैं। ऐसे में कुल 41 परिचालकों की कमी की वजह से आगार बसों के सुचारू संचालन नहीं हो पाने की परेशानी से जूझ रहा है।

10वीं पास होना जरूरीसारथी के लिए आवेदक का कम से कम १०वीं कक्षा पास होना जरूरी है। आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक के पास परिचालक लाइसेंस होना जरूरी है। फिलहाल 10 आवेदन मांगे गए हैं। कम से कम 15 बस सारथी लिए जा सकते हैं।

महीन का 24 लाख का घाटापरिचालकों की कमी के कारण चूरू आगार के बेड़े में शामिल77 बसों का सुचारू संचालन नहीं होने से आगार प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपए के घाटे में चल रहा है। यानि महीने में २४ लाख रुपए का घाटा आगार को उठाना पड़ रहा है।

परिचालक कर रहे बाबू का कामपरिचालकों की कमी के बावजूद चूरूआगार में अनेक परिचालक कार्यालय में बाबू का काम कर रहे हैं। आगार के मुताबिक यहां कार्यरत 100 में से 13 परिचालकों को बस में लगाने की बजाय उनसे कार्यालय में बाबू का काम लिया जा रहा है।

पहले आठ अब 11 हजार पहले लागू की गई योजना में अनुबंधित सारथी को आठ हजार रुपए मानेदय दिया गया था। अब इसे बढ़ाकर 11 हजार रुपए किया गया है। पहले कम मानदेय के कारण कुछमहीने बसें चलाने के बाद आय नहीं मिलने पर सारथी बसें छोड़ गए थे।

परिचालकों की कमी को देखते हुए बस सारथी के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इस बार योजना में कई रियायतें दी गई हैं।परेश्मवरलाल सैनी, मुख्य प्रबंधक रोडवेज बस डिपो, चूरू

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