[ghazipur] - प्रभु श्रीराम के कथा श्रवण से दुर्गोंणों का होता है नाश

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गाजीपुर। कासिमाबाद तहसील के अंवराकोल में माता फूलमती मंदिर पर पिछले कई दिनों से श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है। माता के नवनिर्मित पीतल की मूर्ति की स्थापना के मौके पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ एवं रामकथा के लिए अयोध्या से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक दामोदार दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराया। कहा कि भगवान शिव और माता सती की कथा श्रवण से मानव मोक्ष को प्राप्त करता है। जबकि प्रभु श्रीराम के कथा श्रवण से मानव दुर्गुणों, अहंकार, मोह, लोभ से मुक्त होकर परमात्मा को प्राप्त करता है। एक बार माता सती ने भगवान राम के वनगमन के दौरान भगवान शिव को प्रणाम करने पर भगवान शिव से प्रश्न किया कि आखिर सामान्य राजा के पुत्र को आपने क्यों प्रणाम किया तो भगवान शिव ने कहा कि स्वयं परमब्रम्ह हैं और वे माता सीता की तलाश कर रहे हैं। माता सती ने माता जानकी का रूप बनाकर प्रभु राम की परीक्षा लिया, तब प्रभु राम ने उन्हें पहचान लिया और कहा कि आप अकेले कहा घूम रही हैं माता सती। इस परीक्षा से शर्मिंदा सती ने भगवान शिव से भी झूठ बोलकर भारी गलती किया। इसी प्रकार जब माता सती के लिए राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ समारोह में बिना निमंत्रण माता सती द्वारा भगवान शिव पर दबाव बनाकर जाने लगी, तब भगवान शिव ने उन्हें काफी समझाया कि बिना बुलाए कहीं नहीं जाना चाहिए। अंतत: माता सती अपने पिता के यज्ञ में गई और वहां अपने पति भगवान शिव का कोई स्थान न होने और उनका घोर अपमान होने के कारण माता सती ने हवन-कुंड में कूद कर अपना प्राण त्याग दिया। कथा पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कार मर्यादाओं का अपमान करने वालों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। माता सती ने पति धर्म का अपमान किया, उनसे छल किया तो उन्हें अपने शरीर त्याग के साथ दंड भोगना पड़ा। इसलिए सभी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। इस अवसर पर दिनेश्वर उर्फ कुन्नू पांडे, शिवकुमार पांडेय, फगिश पांडेय, समाज सेवी रमाकांत सिंह, रामअवध यादव आदि की सराहनीय भूमिका रही। संचालन ठाकुर प्रसाद वर्मा ने किया।

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