[jaipur] - जगन्नाथ सागर के साथ सूखी लोगों की आस्था

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जयपुर। आज निर्जला एकादशी है और वर्षो बाद पहली बार जगन्नाथ सागर के जल से ठाकुरजी का अभिषेक नहीं होगा। इस बार जहां भीष्म एकादशी पर लोग निर्जल रह कर व्रत रखेंगे वहीं इसबार सागर की चौबीसियों एकादशी ही निर्जल निकल गई। यदि जेडीए की इसी तरह बेरुखी रही तो आने वालों सालों में भी सागर को निर्जला एकादशी करनी पड़ेगी। गोनेर स्थित जगन्नाथ सागर तालाब के सूखने के साथ ही लोगों की आस्था भी सूखने लगी है। यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की जगदीश महाराज के साथ सागर के प्रति भी आस्था है। पिछले कुछ सालों से सागर के सूखे रहने से लोगों की आस्था भी सुखने लगी है। सागर गोनेर वासियों के लिए ना केवल जल स्त्रोत है, बल्कि इससे ग्रामवासियों के साथ ही यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से भी जुड़ा हुआ है। बेकद्री से सागर के सूखने के साथ लोगों की आस्था भी सूखने लगी है।

कुएं के पानी से बनता है राजभोग:सागर से जगदीश महाराज का संबंध होने से लोग इसे पवित्र सरोवर के रूप में आस्था रखते हैं। सागर की पाल पर बने कुएं के जल से जगदीश महाराज के राजभोग का प्रसाद बनता है और भगवान को स्नान के लिए इसी कुएं का जल जाता है। तीन चार साल से सागर के सुखे रहने अब कुएं का पानी भी कम होने लगा है। यदि कुआं सूख गया तो सदियों पुरानी परंपरा खंडित हो जाएगी।

करते थे नौका विहार जल झूलनी एकादशी पर जगदीश महाराज को सागर में नौका विहार करवाया जाता है। लेकिन कुछ सालों से सागर में पानी नहीं आने से यह परंपरा भी खंडित हो गई है। । दर्शनों के लिए आने वाले लोग सागर में स्नान करते थे और तालाब के जल से आचमन करते थे। इस बार हालात यह रहे कि सागर को चौबीसो एकादशी निर्जल ही रहना पड़ा। पहले तालाब के रख रखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की थी। पंचायत बरसात से पहले तालाब से झाड़ हटवा कर तीनों नहरों सको साफ करवाती थी। जेडीए के अधीन आने के बाद तालाब में पानी की आवक बंद हो गई। मीना पटवा, पूर्व सरपंच गोनेर पंचायत तालाब से जगदशी महाराज का संबंध होने से लोगों की अस्था का केन्द्र भी है। तालाब के सुखने के साथ ही पाल पर बने पारंपरिक जल स्त्रोत भी सुखने लग गए है। ऐसे में कुएं से राजभोग बनाने की परंपरा भी टूट सकती है। सुरेन्द्र शर्मा, प्रवक्ता जगदीश मंदिर

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