[jaipur] - जन्म के 24 घंटे बाद डॉक्टर्स ने फिर से दी नई ज़िन्दगी

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जयपुर. नारायणा अस्पताल के डॉक्टरों ने महज 24 घंटे पहले जन्मी नवजात की हार्ट सर्जरी कर उसे नई जिंदगी देने का इतिहास रचा है। शिशु को मां से मिली बीमारी भ्रूण से ही पता लग गई थी। शिशु की सर्जरी नहीं की जाती तो वह 5-7 दिन ही जिंदा रहता। सर्जरी के बाद अब वह सामान्य जीवन जी सकेगा। यह सर्जरी प्रदेश में दुर्लभतम मानी जा रही ह

सिकुड़ गई थी महाधमनी

सर्जरी करने वाले कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि नवजात को कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा (सीओए) की गंभीर बीमारी थी। नवजात शिशु की महाधनमी (खून की सबसे बड़ी नली) संकुचित होने के कारण शरीर के निचले हिस्से में सामान्य रक्त प्रवाह अवरूद्ध हो रहा था। इस स्थिति के कारण लिवर, गुर्दे जैसे अंगों में रक्त आपूर्ति में कमी आ रही थी।

छोटा सा दिल, नाजुक त्वचा, कोमल नसें, एेसे पार पाई चुनौती

  • 60-90 हजार बच्चों में रोग गंभीर होता है, जिनका जल्दी इलाज जरूरी होता है।

  • 2.7 किलोग्रामी वजनी नवजात को नियोनेटल आईसीयू में निरंतर निगरानी में रखा गया।

  • 20 घंटे के अन्दर नवजात की सभी जांच करने के लिए इको किया गया।

  • दिल का आकार बेहद छोटा था। सर्जरी के दौरान या उसके बाद रक्त स्त्राव या सांस लेने में परेशानी होने की संभावना रहती है।

  • पीडियाट्रिक कार्डियोलोजी विशेषज्ञ डॉ.प्रशांत महावर के नेतृत्व में नवजात शिशु को विशेष दवाइयां दी गई।

  • प्रसव के 48 घंटों के बाद डा.श्रीवास्तव सहित एनेस्थीसिया के डॉ.प्रदीप गोयल की टीम ने ऑपरेशन किया।

प्रसव पर ह्रदय विशेषज्ञ की नजर

हाई रिस्क गर्भावस्था होने के कारण डॉक्टरों ने कार्डियोथोरेसिक सर्जन की आवश्यकता भी जताई। इसके बाद विशेष देखरेख में भी ही प्रसव करवाया गया।

वे ही डॉक्टर कर चुके मां की सर्जरी

संयोग से डॉ.श्रीवास्वत ने 14 साल पहले इस नवजात की मां की एसएमएस अस्प्ताल में सर्जरी की थी नवजात की मां को टेट्रालोजी ऑफ फैलेट नामक जन्मजात विकार था।

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