[jalore] - वेद संसार के सबसे प्राचीन व सनातन ग्रंथ-आचार्य

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जालोर. स्वामी आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक की ओर से लिखित वेद विज्ञान-आलोक शोध ग्रंथ के उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू की ओर से दिल्ली में विमोचन के बाद आचार्य ने शुक्रवार को जालोर के सीनियर सिटीजन पार्क में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक ने कहा कि वेद विज्ञान-आलोक ग्रंथ वैदिक विज्ञान संबंधी साहित्य का अतिमहत्वपूर्ण व क्रांतिकारी ग्रंथ है। जिसका उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने विमोचन किया है। उन्होंने बताया कि वेद संसार के सबसे प्राचीन व सनातन ग्रंथ है। इन्हें समझने के लिए इनके व्याख्यान रूप अति महत्वपूर्ण ग्रंथ ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की। इनमें ऋग्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ महर्षि ऐतरेय महीदास की ओर से करीब सात हजार साल पूर्व रचा गया। इसका नाम ऐतरेय ब्राह्मण है।यह सबसे प्राचीन ब्राह्मण ग्रंथ है। ब्राह्मण ग्रंथों की भाषा जटिल व सांकेतिक होने से सदैव रहस्यमयी रही है। देश व विदेश के कुछ भाष्यकारों ने इसकी कर्मकांडपरक व्याख्या की है। आचार्य ने बताया कि उन्होंने इस ग्रंथ का संभवत: विश्व में प्रथम बार वैज्ञानिक भाष्य किया है। उन्होंने इस भाष्य का नाम 'वेद विज्ञान-आलोक' दिया है। जो चार भागों में 2800 पृष्ठों में प्रकाशित है। उन्होंने बताया कि इस ग्रंथ में कॉस्मोलॉजी, एस्ट्रोफिजिक्स, क्वांटम फिल्ड थ्योरी, प्लाज्मा फिजिक्स, पार्टीकल फिजिक्स एंड स्ट्रींग थ्यौरी जैसे विषयों का विवेचन किया गया है।उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ वर्तमान सैद्धांतिक भौतिकी के लिए बहुत सहायक होगा। कार्यक्रम संयोजक बीएल सुथार, मोहन पाराशर, ईश्वरलाल शर्मा, विशाल आर्य समेत अन्य मौजूद रहे।

उपराष्ट्रपति ने किया ग्रंथ का विमोचनभीनमाल. भागलभीम के श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास व वेद विज्ञान मंदिर के संस्थापक आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक के ग्रन्थ वेदविज्ञान आलोक (एतरेय ब्राह्मण की वैज्ञानिक व्याख्या) का नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने विमोचन किया। इस मौके उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा की स्वतंत्रता के बाद वेद पर अनुसंधान का कार्य होना चाहिए था, जो नहीं हुआ। उन्होंने आर्य समाज की सेवाओं को स्मरण करते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता में आर्य समाज ने क्रांतिकारी भूमिका निभाई। आचार्य नैष्ठिक ने बताया कि ग्रंथ वेदीय ऐतरेय ब्राह्मण का वैज्ञानिक भाष्य है। यह ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के वैदिक सिद्धान्त को प्रस्तुत करता है। उन्होनें बताया कि यह ग्रन्थ 28 00 पृष्ठ में कुल चार भागों में प्रकाशित है। इस प्रकार का वैज्ञानिक भाष्य विश्व में प्रथम बार किया गया है। आचार्य नैष्ठिक ने उपराष्ट्रपति को बताया कि यह ग्रन्थ आधुनिक भौतिकी को एक नई क्रांतिकारी दिशा देगा। इस मौके ग्रन्थ के संपादक शिष्य विशाल आर्य, अभिषेक आर्य निंबावास, सुरेशचंद्र आर्य, किशनलाल गहलोत, जयसिंह गहलोत, प्रकाश देवी, बलबीरसिंह मलिक, सतीश कौशिक मौजूद थे।

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