[jharkhand] - हौसलों की उड़ान: मोमो के स्टॉल से थियेटर क्लासेज तक का सफर...

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झारखंड से पांच या छह साल पहले जब वो दिल्ली आया था तो उस वक्त कहीं भी एक्टिंग का ख्याल उसके मन में नहीं था. आर्थिक तंगी की वजह से वो और उसके भाई गांव छोड़कर दिल्ली कमाने के लिए आए थे. लेकिन इन सबके बीच विकास के मन में कहीं था कि उसे कुछ अलग करना है. उसे एक्टिंग सीखनी थी, आज उसकी सब्जियों की एक दुकान है और दुकान के साथ अभिनय करने का उसका सपना.सब्जियों की इस दुकान में आपको एक तरफ सब्जियां दिखेंगी तो दूसरी तरफ कार्डबोर्ड बॉक्स में रखी प्रेमचंद की निर्मला और शरतचंद्र की देवदास. विकास ने पढ़ाई 10वीं तक ही की है. लेकिन नाटकों में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभाने के लिए वो ऐसी कई किताबें पढ़ चुका है. पूछने पर वो बताता है कि अब तक प्रेमचंद की 'निर्मला', शरतचंद्र की 'देवदास' और मोहन राकेश की 'आषाढ़ का एक दिन' पढ़ी है.

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