[ludhiana] - पंजाब पुलिस ने बिना एफआईआर थानेदार को भेजा जेल-थानेदार का आरोप अकाली नेता से अफीम पकडने के बदले मिली उसे जेल व गंवानी पडी नौकरी

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सभी केंद्रएफआईआर के बिना भी इंस्पेक्टर ने बिताए दो सालचार साल तक पंजाब पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखा पक्ष, इसलिए नहीं मिली जमानतसुप्रीम कोर्ट जमानत लेने पहुंचा थानेदार सजा काटकर लौटा, नौकरी बहाल करने की मांगअमर उजाला ब्यूरोबठिंडा। 2006 में मलोट निवासी उस समय के अकाली नेता से अफीम मिलने पर पंजाब पुलिस के एक इंस्पेक्टर को अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी और बिना एफआईआर के दो साल मुक्तसर की जेल में बिताने पडे़। पंजाब पुलिस की लापरवाही तब सामने आई जब पीड़ित सब इंस्पेक्टर कृष्ण लाल ने जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की तो पंजाब पुलिस व सूबा सरकार ने चार साल तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका के तहत कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए पीड़ित को जमानत नहीं मिली। आखिरकार थानेदार को दो साल सजा काटकर रिहा कर दिया गया। यह बात पंजाब पुलिस से डिसमिस किए सब इंस्पेक्टर कृष्ण लाल ने दस्तावेजों के साथ एक बातचीत में बताई। डिसमिस इंस्पेक्टर ने बताया कि 2006 में जब वह मलोट में एंटी नारकोटिक सेल का प्रभारी था। उस समय मलोट के अकाली नेता परमजीत सिंह सोनियार से 800 ग्राम अफीम बरामद की थी। इंस्पेक्टर के अनुसार परमजीत का रसूख इतना था कि उस समय मुक्तसर के एसएसपी एलके यादव ने अकाली नेता पर एनडीपीएस एक्ट का केस न दर्ज कर किसी अज्ञात व्यक्ति पर दर्ज किया था।इंस्पेक्टर ने बताया कि घटना के तीन माह बाद ही उस समय मलोट के डीएसपी मनजीत इंदर बल ने परमजीत के साथ मिलकर मामले में उल्टा उसे ही उलझा लिया और अपने पद का दुरुपयोग कर बिना कोई एफआईआर किए उसे झूठे गवाहों के सहारे सिर्फ कागजी कार्रवाई के तहत अदालत से 2011 में दो साल की सजा करा दी। पूर्व इंस्पेक्टर ने बताया कि जब उसने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सजा संबंधी अपील की तो वहां भी परमजीत सिंह और डीएसपी मनजीत ने रसूख का उपयोग कर याचिका की सुनवाई ही नहीं होने दी। पूर्व इंस्पेक्टर ने बताया कि 2014 में जब उसने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की तो सुप्रीम कोर्ट ने उसके वकील की दलीलों से सहमत होते हुए पंजाब पुलिस व पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया। पूर्व इंस्पेक्टर के अनुसार 2014 से लेकर 09 फरवरी 2018 तक पंजाब पुलिस व पंजाब सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। जबकि वह अपनी दो साल की पूरी सजा काट कर 2016 में वापस आ गया था। अब पंजाब पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब दिया है।डीजीपी पर नौकरी से डिसमिस करने का आरोपइसके अलावा पंजाब पुलिस के डीजीपी ने भेदभाव करते हुए पंजाब पुलिस रूल की उल्लंघना कर उसे नौकरी से डिसमिस कर दिया। जबकि नियमों के तहत तीन साल से कम सजा वाले पुलिसकर्मी को डिसमिस नहीं किया जा सकता। पूर्व इंस्पेक्टर ने अब सरकार से मांग की कि उसके साथ अपने ही विभाग के अधिकारियों की धक्केशाही की निष्पक्ष जांच करवाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और उसे नौकरी पर बहाल किया जाए।जांच के बाद ही कुछ बता पाएंगे : एसएसपीइस संबंध में जब मलोट के परमजीत सिंह सोनियार से बात की गई तो उसने कहा कि वह न तो अकाली और न ही कांग्रेसी हैं, वह तो आम इंसान हैं। इंस्पेक्टर कृष्ण लाल के मामले से उसका कोई संबंध नहीं है। चार साल तक सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब न देने पर जब मुक्तसर के एसएसपी सुशील कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह जांच करा लेते है और जांच के बाद ही वह कुछ बता पाएंगे।

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