[panipat] - कारपेट उद्यमियों ने खट्टर सरकार से मांगी गुजरात की तर्ज पर ई वे बिल में छूट

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कारपेट उद्यमियों ने खट्टर सरकार से मांगी गुजरात की तर्ज पर ई वे बिल में छूट -ई वे बिल को लेकर हुई हरियाणा कारपेट मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन पदाधिकारियों की बैठक -पानीपत की 200 कारपेट फैक्टरियों के लिए ई वे बिल बना परेशानी का कारण - सेल पर 50 हजार रूपये तक की छूट पर प्रोसेस पर नहीं हैं कोई छूट -कारपेट उद्यमियों को छूट नहीं दी तो कारपेट निर्यात 3000 करोड़ से घटकर रह सकता हैं आधा: अनिल मित्तल फोटो 5 अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत। शहर की करीब 200 कारपेट की फैक्टरियां ई वे बिल के चक्रव्यूह में फंस कर दम तोड़ने पर मजबूर हैं। इन फैक्टरियों में करीब 50 फैक्टरियां तो बड़ी हैं, जिनका की ज्यादातर कारपेट बनाने का कार्य उनकी अपनी ही फैक्टरियों में होता हैं, जिससे उन्हें अपना माल प्रोसेस यानी जॉब वर्क के लिए बाहर नहीं भेजना पड़ता। लेकिन करीब 150 फैक्टरियां ऐसी हैं जोकि अपना भी कारपेट बनाकर निर्यात करती हैं और वे जॉब वर्क का भी कार्य करती हैं और जॉब वर्क पर कार्य करवाती भी हैं। इन सभी कारपेट की 200 फैक्टरियों द्वारा करीब 3000 हजार करोड़ रूपये का सालाना निर्यात होता हैं और इनमें 20 से 22 हजार श्रमिक काम करते हैं। ई वे बिल के लागू होने के उपरांत जॉब वर्क पर कार्य करवाने वाले व जॉब वर्क करने वालो को भारी शिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं, क्योंकि सरकार ने सेल पर तो ई वे बिल पर 50 हजार रूपये तक की छूट दी हुई हैं पर फैक्टरियों द्वारा जॉब वर्क पर प्रोसेस के लिए भेजने वाले माल पर ई वे बिल पर कोई छूट नहीं हैं और वह जीरो से लगना शुरू होता हैं। इन फैक्टरी वालो को अपना माल डाईंग, प्रिंटिंग, कटिंग, स्टिचिंग, टफटिंग,पेस्टिंग आदि को लेकर जॉब वर्क के लिए दूसरी फैक्टरियों में भेजना पड़ता हैं। ई वे बिल अब इन फैक्टरी मालिकों के लिए जी का जंजाल बन चुका हैं। ई वे बिल को लेकर कारपेट उद्यमियों के सामने आ रही परेशानी को लेकर हरियाणा कारपेट मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को शहर के एक निजी होटल में हुई। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान अनिल मितल, सचिव धर्मबीर, उपप्रधान रणबीर राणा, कैशियर नरेंद्र व कार्यकारिणी सदस्य मनदीप डावर, सुभाष नागपाल आदि ने भाग लिया। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान अनिल मितल ने बताया कि पानीपत की 200 में से करीब 150 फैक्टरियों के लिए ई वे बिल परेशानी का सबब बन चुका हैं। मितल ने बताया कि पानीपत में 50 हजार से उपर ई वे बिल में छूट हैं पर प्रोसेस यानि जॉब वर्क पर भेजने के लिए कोई छूट नहीं हैं। जबकि गुजरात राज्य में वहां की प्रदेश सरकार ने मुनिसिपील्स लिमिट के अंदर कारपेट की सेल व प्रोसेस में छूट दी हुई हैं और पूरे राज्य में केवल 19 आईटमों को छोडक़र सभी पर ई वे बिल पर छूट हैं। वहीं एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब ई वे बिल में कारपेट पर गुजरात राज्य में छूट दी जा सकती हैं तो पानीपत में छूट क्यों नहीं दी जा सकती। इसलिए आज वे हरियाणा सरकार से गुजरात राज्य की तर्ज पर ही ई वे बिल पर छूट की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी 15 जून को ही दिल्ली सरकार ने भी 1 लाख रूपये तक ई वे बिल में सेल व प्रोसेस दोनो पर ही छुट दी हैं। कारपेट एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों ने चेताया कि यदि सरकार ने कारपेट व्यापारियों को ई वे बिल में छुट नहीं दी तो पानीपत में कारपेट का निर्यात 3000 करोड़ से घटकर आधा भी रह सकता हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बारे में सोमवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे और जल्द ही कारपेट व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर गुजरात राज्य की तर्ज पर ई वे बिल पर छुट देने की मांग करेगा।

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