[sri-ganganagar] - पाक जाने बांग्लादेशी अब नहीं आते श्रीगंगानगर बॉर्डर तक

  |   Sri-Ganganagarnews

श्रीगंगानगर.

जिले से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से पाकिस्तान में घुसपैठ के लिए बांग्लादेशियों के जत्थे आने अब बंद हो गए हैं। एक समय था जब 100 से 150 तक की संख्या में बांग्लादेशी मीलों लंबा सफर तय कर यहां तक पहुंचते थे और फिर जान जोखिम में डाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय क्षेत्र में की गई तारबंदी तक पहुंचने के प्रयास में पकड़े जाते थे। तारबंदी से पहले बांग्लादेशी घुसपैठ में कामयाब भी होते रहे। रोहिंग्या मुसलमानों की भारत में घुसपैठ शुरू होने के बाद भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी होने और सीमा सुरक्षा बल की सख्ती के चलते पाकिस्तान जाने की चाह में बांग्लादेशियों का श्रीगंगानगर बॉर्डर तक आना बंद हो गया।

पाकिस्तान जाने के लिए बांग्लादेशियों का श्रीगंगानगर बॉर्डर तक आना अस्सी के दशक में शुरू हुआ और 2015 से पहले तक जारी रहा। बॉर्डर पर तारबंदी से पहले तो बांग्लादेशियों के जत्थे श्रीगंगानगर पहुंचते थे। दिनभर ये किसी पार्क में पड़ाव डाले रहते और अंधेरा गहराते ही गायब हो जाते। पंजाब में आतंकवाद के दौरान श्रीगंगानगर जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा से पाक प्रशिक्षित आतंककारियों की घुसपैठ और हथियारों की खेप आने की कई घटनाएं हुईं।

इसके बाद केन्द्र सरकार ने तारबंदी करवाई, बावजूद इसके बांग्लादेशियों का आना बंद नहीं हुआ। अलबत्ता तारबंदी के बाद सीमा पर चौकसी बढ़ी तो पाकिस्तान जाने की फिराक में अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र तक पहुंचने वाले बांग्लादेशी सीमा सुरक्षा बल के हत्थे चढऩे लगे। पकड़े गए बांग्लादेशियों को बाद में बल के अधिकारी संबंधित थाने को सौंप देते जहां उनके खिलाफ पासपोर्ट एक्ट में मामला दर्ज होता।

ऐसे लगी आने पर रोकसी मा सुरक्षा बल सूत्रों के अनुसार रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी आतंकियों की घुसपैठ से निपटने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी के साथ चौकसी बढ़ाने के बाद उधर से घुसपैठ लगभग बंद हो गई है। इसके अलावा बांग्लादेशियों को श्रीगंगानगर बॉर्डर से पाकिस्तान भेजने वाले दलालों के पकड़े जाने से इस क्षेत्र में बांग्लादेशियों का आना बंद हो गया। बांग्लादेशियों को इस क्षेत्र में लाने वाला दलाल बिलाल 2015 में मोहनपुरा के पास पकड़ा गया था। इसे पकडऩे के लिए बीएसएफ और पुलिस को 22 घंटे लंबा ऑपरेशन चलाना पड़ा। तब दलाल के साथ नौ बांग्लादेशी भी पकड़े गए थे। उसके बाद की स्थिति पर नजर डालें तो पिछले तीन सालों में मात्र एक बांग्लादेशी पकड़ा गया है।

बॉर्डर से बॉर्डर तकभा रत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत में घुसपैठ करने के बाद बांग्लादेशी कोलकात्ता पहुंचते और वहां से दिल्ली के लिए गाड़ी पकड़ते। दिल्ली से दलाल उन्हें सीधे या फिर जयपुर होते हुए श्रीगंगानगर तक लाता। बांग्लादेशियों के पाकिस्तान जाने के दो ही कारण सामने आए। पहला वहां रोजगार करना और दूसरा पाकिस्तान में रह रहे अपने रिश्तेदारों के पास जाकर बसना। बॉर्डर तक पहुंचने के एवज में बांग्लादेशियों को एक निश्चित राशि दलाल को देनी पड़ती। लेकिन दलाल इतने शातिर होते थे कि बांग्लादेशियों को श्रीगंगानगर में छोड़ कर गायब हो जाते। दलाल उन्हें यही कहता कि बॉर्डर यहां से थोड़ी दूर है। रात होने पर निकलना और जब तारबंदी आ जाए तो उसे पार कर पाकिस्तान चले जाना।

पुलिस के लिए सिरदर्दीबांग्लादेशी जब तक आए, पुलिस के लिए सिरदर्दी बने रहे। सीमा सुरक्षा बल की ओर से सौंपे जाने के बाद उनकी देखभाल और भोजन आदि की जिम्मेदारी तब तक पुलिस पर रहती जब तक कि उन्हें वापस भेजे जाने के आदेश नहीं होते। सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिए जाने के कारण बांग्लादेशियों के खाने-पीने की व्यवस्था पुलिस को अपने स्तर पर करनी पड़ती। दिक्कत तब आती जब सीमा सुरक्षा बल की ओर से 100-50 बांग्लादेशियों को थाने के हवाले कर दिया जाता।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/tTBzMwAA

📲 Get Sri Ganganagar News on Whatsapp 💬