[uttarkashi] - गंगोत्री आएं तो तीर्थ पुरोहितों के खातों में देखें अपने पुरखों के नाम

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गंगोत्री (उत्तरकाशी)। सदियों से चल रही चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों के नाम अपने खातों में दर्ज कर तीर्थ पुरोहितों ने एक समृद्ध दस्तावेजी खजाना एकत्र किया है।गंगा सभा के सचिव प्रकाश चंद्र सेमवाल बताते हैं कि अब गंगोत्री धाम में ही दो मंजिला पक्का भवन तैयार कर इसमें बही खातों के अवलोकन की व्यवस्था की गई है। यहां डेढ़ सौ साल पुराने बही खाते मौजूद हैं। गंगा सभा एवं गंगोत्री मंदिर समिति ने यहां 160 तीर्थ पुरोहित परिवारों के बीच देशभर के 665 जिलों की यजमानी एवं बही खातों का बंटवारा किया है। समिति के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है कि गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद तीर्थ पुरोहित इन खातों में दर्ज अपने यजमानों के घरों तक जाकर उन्हें मां गंगा का प्रसाद और आशीर्वाद पहुंचाते हैं।न्यायालय में भी काम आए धाम के बही खाते90 वर्षीय तीर्थ पुरोहित शांति प्रसाद सेमवाल बताते हैं कि कुछ दशक पूर्व हाथरस उत्तरप्रदेश के उद्योगपति लोहिया परिवार के उत्तराधिकार मामले में गंगोत्री धाम के बही खाते न्यायालय में भी पेश किए गए थे। संतानहीन होने पर लोहिया परिवार ने एक बच्चे को गोद लिया था और बच्चे समेत गंगोत्री धाम की यात्रा के दौरान उन्होंने बाकायदा उसे अपना वारिस बताते हुए बही खाते में नाम दर्ज कराया था। उनके निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर हुआ विवाद न्यायालय तक पहुंचा था। तब इसी बही खाते के आधार पर न्यायालय ने गोद लिए गए पुत्र को उत्तराधिकारी घोषित किया था।

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