[uttarkashi] - गोमुख और गंगा भागीरथी में जमा मलबे से नहीं कोई खतरा: पीयूष रौतेला

  |   Uttarkashinews

उत्तरकाशी। गोमुख से गंगोत्री धाम तक गंगा भागीरथी में जमा मलबे से उत्पन्न खतरे की संभावनाओं को विशेषज्ञों ने नकार दिया है। आपदा प्रबंधन के कार्यकारी निदेशक पीयूष रौतेला के नेतृत्व वाली टीम ने मलबा जमा होने की घटना को प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हुए गोमुख के मुहाने पर झील बनने की संभावना से भी इंकार किया है।बीते वर्ष गंगोत्री ग्लेशियर में नीला ताल टूटने से गोमुख के मुहाने पर झील बन गई थी, जिसकी जांच के लिए 19 जून को भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, सिंचाई विभाग एवं एसडीआरएफ की टीम ने गोमुख क्षेत्र का निरीक्षण किया था। शुक्रवार को उत्तरकाशी लौटने पर आपदा प्रबंधन के कार्यकारी निदेशक पीयूष रौतेला ने बताया कि ड्रोन कैमरे की मदद से गोमुख और आसपास के क्षेत्र का मुआयना किया गया था, जिससे पता चला है कि मलबे के कारण नदी का रुख बदला है, लेकिन गोमुख के पास कोई झील बनने की संभावना नहीं है। गंगा भागीरथी में मलबा जमा होना प्राकृतिक प्रक्रिया है। गोमुख से गंगोत्री धाम तक की दूरी अधिक और ढाल कम होने के साथ ही यहां कोई आबादी नहीं होने के कारण इससे किसी प्रकार का खतरा नहीं है। हालांकि मलबा आने से गोमुख-तपोवन का पारंपरिक ट्रैक जोखिम भरा हो गया है, जिस पर बिना सुरक्षा उपकरणों एवं विशेषज्ञ गाइड के किसी पर्यटक को जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी ओर भोजवासा स्थित जीएमवीएन विश्राम गृह के निकट भी पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं, जिस पर बराबर नजर रखने और सुरक्षा इंतजाम की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को लोहारीनाग-पाला में गंगा के ऊपर बने पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी दी। इस पर जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान ने अधिकारियों को पुल को ध्वस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/LcPplwAA

📲 Get Uttarkashi News on Whatsapp 💬