[uttarkashi] - जर्जर ट्राली से जोखिम भरी आवाजाही को मजबूर स्याबा के ग्रामीण

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उत्तरकाशी। आपदा के पांच साल बाद भी स्याबा के ग्रामीण ट्रॉली के रस्से खींचकर जोखिम के साथ गंगा भागीरथी नदी को पार करने को मजबूर हैं। इतने सालों में जर्जर हुई ट्रॉली हादसों को न्योता दे रही है। ग्रामीणों को अब नकदी फसलें बाजार तक लाने की चिंता सताने लगी है।वर्ष 2013 की बाढ़ में नौलुणा में गंगा भागीरथी पर बना झूल पुल बह गया था, जिससे भटवाड़ी का स्याबा गांव अलग-थलग पड़ गया था। ग्रामीणों की आवाजाही के लिए लोनिवि ने नदी पार करने के लिए ट्रॉली लगाई थी। पांच साल से ग्रामीण इसी ट्रॉली के सहारे जोखिमभरी आवाजाही कर रहे हैं। इस स्थान पर विश्व बैंक लोनिवि की ओर से पैदल गार्डर पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण की सुस्त रफ्तार के चलते अभी तक पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।स्याबा के प्रधान बृजमोहन पंवार, भागवत सिंह, मानेंद्र चौहान, देवेंद्र राणा, अतर सिंह, राजेंद्र राणा आदि ने बताया कि पांच साल में ट्रॉली जर्जर हो चुकी है। ट्रॉली खींचने वाले तार कमजोर होकर टूटने की हालत में है। झूलते तारों के साथ ट्रॉली किनारे पर बने प्लेटफार्म तक नहीं पहुंच रही। अब खेतों से नकदी फसलें निकलने का समय आ गया है, लेकिन जर्जर ट्राली के सहारे नकदी फसलें मंडी तक पहुंचाने की स्थिति नहीं है। उन्होंने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर पुल का निर्माण कराने और तब तक जर्जर ट्राली को दुरुस्त कराने की मांग की है।कोट..........नौलुणा में करीब सात करोड़ रुपये लागत से 110 मीटर स्पान का पैदल गार्डर पुल बनाया जा रहा है। पुल की बॉटम कोर बिछाई जा चुकी है। फिलहाल नदी में पानी बढ़ने के कारण काम की रफ्तार धीमी है। मानसून सीजन के बाद काम में तेजी लाकर पुल का निर्माण कराया जाएगा।-रमेश चंद्र आर्य, ईई लोनिवि विश्व बैंक उत्तरकाशी।कोट...........नौलुणा में लगाई ट्रॉली की भार वहन क्षमता डेढ़ क्विंटल है। क्षमता से अधिक वजन ढोने के कारण दिक्कत आ रही है। हाल ही में ट्राली की ग्रीसिंग आदि मरम्मत करायी गई है। ट्राली के लिए नई केबल भी मंगाई गई है, जल्द ही इसे बदलवाया जाएगा।-आरएस खत्री, ईई लोनिवि भटवाड़ी।

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