[dehradun] - रिपोर्ट में हुआ खुलासा: उत्तराखंड से 10 साल में पांच लाख लोगों का पलायन

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उत्तराखंड से पिछले एक दशक में पांच लाख दो हजार 707 लोग पलायन कर गए हैं। इनमें एक लाख 18 हजार 981 लोग स्थायी रूप से घरबार छोड़ चुके हैं।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के सर्वेक्षण की पहली अंतरिम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने सरकारी आवास पर रिपोर्ट का लोकार्पण किया। रिपोर्ट में पलायन की सबसे बड़ी वजह रोजगार के संसाधनों और आजीविका का अभाव है।

चिकित्सा सुविधा और बेहतर शिक्षा की कमी की वजह से भी लोगों ने घरबार छोड़ दिया है। वर्ष 2011 की जनगणना के बाद प्रदेश में 734 राजस्व गांव गैर आबाद हो गए हैं, जिन्हें अब ‘घोस्ट विलेज’ पुकारा जा रहा है। 565 राजस्व गांव व तोक में वर्ष 2011 के बाद 50 फीसदी आबादी पलायन कर चुकी है, जिनमें छह गांव अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 850 ऐसे गांव पाए गए जिनमें पलायन करने वाले लोगों ने घरवापसी की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन के प्रमुख कारणों का सरकार को पहले से ही इल्म था। सरकार समाधान की ओर बढ़ रही है। 2020 तक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

पर्वतीय राज्यों में पलायन की समान समस्या

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्यों में पलायन की एक सी समस्या है। उत्तराखंड में पलायन की दर 36.2 फीसदी है, जबकि हिमाचल में 36.1 फीसदी लोग पलायन कर रहे हैं। सिक्किम में यह 34.6 प्रतिशत है। जम्मू और कश्मीर में 17.8 फीसदी लोग पलायन करते हैं। वहां पलायन की दर इसलिए कम हैं क्योंकि वह कतिपय संवैधानिक बाध्यताएं हैं।

एक दशक में पलायन की समस्या

-3,83,726 लोगों का 6338 ग्राम पंचायतों से अस्थायी पलायन

-1,18,981 लोगों का 3946 ग्राम पंचायतों से स्थायी पलायन

-50 प्रतिशत लोगों ने आजीविका व रोजगार के अभाव में छोड़ा घरबार

-15 फीसदी ने बेहतर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होने से चले गए

-08 फीसदी ने चिकित्सा की सुविधा न होने से गांव छोड़ दिया

-70 फीसदी लोगो ने राज्य के भीतर ही किया पलायन

-30 फीसदी लोगों का पलायन राज्य से बाहर एक फीसदी गए विदेश

युवाओं का सबसे अधिक पलायन

रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में सबसे अधिक पलायन करने वाले युवा हैं। पिछले 10 साल में 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 42 फीसदी युवा घरबार छोड़ गए। 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 29 फीसदी ने और 25 वर्ष से कम आयु वर्ग में 28 फीसदी ने पलायन किया।

राज्य आंदोलन के समय से ही पलायन की बात हो रही थी। राष्ट्रीय दलों ने भी पलायन को बड़ा कारण माना। लेकिन इस समस्या के अध्ययन का काम नहीं किया। यह काम हमने किया। इसकी ठोस परिणति हमारे सामने है। सरकार गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर, अच्छी और समान शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से पलायन की समस्या का समाधान करेगी। 2020 तक इनके नतीजे दिखाई देंगे।

  • त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

यह अभी अंतरिम रिपोर्ट है। सर्वे के जरिए हमने बीमारी पकड़ ली है और अब आयोग इसके इलाज का रास्ता निकालेगा। रिवर्स पलायन के लिए सहज वातावरण बनाने से लेकर सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने की दिशा में सरकार को सुझाव दिए जाएंगे। आयोग की वेबसाइट पर रिवर्स माइग्रेशन के संबंध में सुझाव मांगे जा रहे हैं।

  • डॉ. एस.एस. नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/Jx0q8QAA

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