🏢सुप्रीम कोर्ट ने शादी लायक उम्र नहीं 😲होने पर वयस्क कपल को लिव-इन में रहने की 😱दी छूट

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सुप्रीम कोर्ट ने अखिला उर्फ हादिया के बाद अब एक और मामले में केरल हाईकोर्ट के शादी रद्द करने के फैसले को बदल दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवाह हो जाने पर उसे रद्द नहीं किया जा सकता है। ऐसे में उनका लिव इन रिलेशनशिप को वैध है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि शादी के बाद भी अगर वर- वधू में से कोई भी विवाह योग्य उम्र से कम हो तो वो लिव इन रिलेशनशिप में साथ रह सकते हैं। इससे उनके विवाह पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने के अधिकार को ना तो कोई कोर्ट कम कर सकता है ना ही कोई व्यक्ति, संस्था या फिर संगठन। अगर युवक विवाह के लिए तय उम्र यानी 21 साल का नहीं हुआ है तो भी वह अपनी पत्नी के साथ 'लिव इन' रह सकता है।

बता दें कि कोर्ट के फैसलों के अलावा संसद ने भी घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिलाओं के संरक्षण के प्रावधान तय कर दिए हैं। कोर्ट ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि अदालत को मां की किसी भी तरह की भावना या पिता के अहंकार से प्रेरित एक सुपर अभिभावक की भूमिका नहीं निभानी चाहिए।

दरअसल, ये मामला केरल का है. अप्रैल 2017 में केरल की युवती तुषारा की उम्र तो 19 साल थी यानी उसकी उम्र विवाह लायक थी पर नंदकुमार 20 ही साल का था। यानी विवाह के लिए तय उम्र से एक साल कम। शादी हो गई तो लड़की के पिता ने बेटी के अपहरण का मुकदमा दूल्हे पर कर दिया था।केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को हैबियस कॉर्पस के तहत लड़की को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया. पेशी के बाद कोर्ट ने विवाह रद्द कर दिया था।

यहां देखें फोटो-http://v.duta.us/zPxnkwAA

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