[allahabad] - तबले-घुंघरू में नोकझोंक, लय-ताल पर सवाल-जवाब

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तबले और घुंघरू की नोकझोंक, लय-ताल पर सवाल -जवाब के साथ कथक नृत्य की थिरकन शनिवार की शाम लोगों के अंतस में रस बस गई। शिव तांडव से लेकर राधा-कृष्ण के महारास तक के भाव नृत्य में पिरोए गए। नृत्यांगनाओं और नर्तकों ने छोटी-छोटी तिहाइयों, टुकड़ों पर पारंपरिक शैली में भावों-इशारों के साथ चितवन की मोहक अदाओं से जमकर तालियां बटोरीं। इसी के साथ प्रयाग संगीत समिति के प्रेक्षागृह में कथक केंद्र नई दिल्ली की ओर से आयोजित दो दिवसीय कथक ग्रीष्म महोत्सव ने विराम ले लिया।

शाम करीब 6:30 बजे शुरुआत हुई नृत्यांगना मालती शाह के कथक नृत्य से। उन्होंने अर्धनारीश्वर के भावों में आमद की। तीन ताल में बंदिश के बोल थे- अर्धांग भस्म भभूत सोहे...। इस बोल पर पारंपरिक उपज, थाट, आमद, तिहाइयों के अलावा चक्करदार की उन्होंने मोहक प्रस्तुति की। फिर दादरा ताल में पं. विद्यादीन रचित ठुमरी के बोल- छोड़ो छोड़े बिहारी नारी देखे सगरी... पर भावपूर्ण नृत्य से मन मोह लिया। इनके बाद मुकेश गंगानी और पार्थ मंडल ने शिव कवच पर आधारित नृत्य पेश किया। जय शिव शंकर जय अभयंकर के बोल पर विलंबित तीन ताल के बाद मध्य लय धमार ताल में सधे अंदाज में इस जोड़ी ने नृत्य प्रस्तुति से वाहवाही बटोरी।

इनके बाद होली पर आधारित रंगोत्सव के तहत राधा-कृष्ण के रास पर समूह नृत्य हुआ। इसमें विश्वदीप, शिप्रा जोशी, निलाक्षी खांडेकर, अभिषेक खीची, रोहित पवार, जया भट्ट, भवानी गंगानी, प्रदीप पाठक, नीरा रावत ने हिस्सा लिया। तबले पर राहुल विश्वकर्मा, पखावज पर भीमसेन, सारंगी पर गुलाम वारिस, सितार पर उमाशंकर, बांसुरी पर विनय प्रसन्ना ने संगत की। समिति के अपर निदेशक देवेंद्र सिंह, उप निबंधक प्रदीप कुमार, सहायक निदेशक शंकरी गुहा, महेश जायसवाल, नवीन कुमार उपस्थित थे। सचिव अरुण कुमार ने कलाकारों को स्मृति चिह्न प्रदान किया। संचालन किया अर्चना दास ने।

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