[allahabad] - भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर पहला मुकदमा दर्ज

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई ने मामले में पहला मुकदमा दर्ज किया है। मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए जाने और कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाए जाने के मामले में सीबीआई ने आयोग के अज्ञात अफसरों और कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

सीबीआई की टीम यूपीपीएससी की ओर से पहली अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2017 तक जारी भर्ती परीक्षाओं के परिणाम की जांच कर रही है। प्राथमिक जांच में ही सीबीआई को कई गंभीर शिकायतें मिलीं और ये शिकायतें काफी हद तक सही निकलीं। स्केलिंग, मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए गए, इंटरव्यू में मनमाने तरीके से नंबर दिए गए, उत्तर पुस्तिकाएं बदल दी गईं, पेपर आउट होने के बावजूद परीक्षा निरस्त नहीं की गई, आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया गया, धर्म एवं जाति विशेष के अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर फायदा पहुंचाया गया। पीसीएस-2015 में मॉडरेशन की आड़ में कई अयोग्य अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर चयनित कर लिया गया और बहुत से योग्य अभ्यर्थियों के नंबर घटाकर उन्हें मेरिट से बाहर कर दिया गया।

इस मसले पर सीबीआई ने एक माह तक गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में पीसीएस-2015 के चयनित अफसरों से पूछताछ की। इसके अलावा आयोग के कुछ वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों और अफसरों से भी पूछताछ की गई। इस दौरान मॉडरेशन के नाम पर हुई धांधली से जुड़े कई पुख्ता सुबूत सीबीआई को मिले और अब इसी आधार पर सीबीआई ने मामले में मुकदमा दर्ज किया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई जांच पर रोक से इनकार कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीबीआई अपनी कार्रवाई तेज करेगी और जल्द ही मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

मॉडरेशन मुख्य परीक्षा के अनिवार्य विषयों में होता है। पीसीएस-2015 में अनिवार्य विषय सामान्य हिंदी में मॉडरेशन नाम पर कुछ योग्य अभ्यर्थियों के 15 नंबर तक घटा दिए और कुछ अभ्यर्थियों के 21 नवंबर तक बढ़ाकर उनका चयन कराया गया। इसी तरह दूसरे अनिवार्य विषय निबंध के पेपर की कॉपियों में 20 नंबर तक घटाए और कुछ अभ्यर्थियों को अधिकतम 28 नंबर तक का फायदा पहुंचाया गया। सीबीआई की एफआईआर में कहा गया है कि इस तरह से किया गया मॉडरेशन पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और फ्रॉड है।

  • सीबीआई ने आयोग के जिन अज्ञात अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, उन अफसर पर टिप्पणी की गई है कि उन्होंने अपने पद का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। यह आपराधिक षड़यंत्र और धोखाधड़ी का मामला है। सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि आयोग ने मॉडरेशन के मामले में ‘संजय सिंह बनाम यूपीपीएससी’ पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन किया और अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से नंबर दिए। सीबीआई की एफआईआर में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि जांच में यूपीपीएससी ने असहयोग किया। साथ ही आयोग ने कई सूचनाएं छिपाईं, जो जांच के लिए काफी महत्वपूर्ण थीं।

इसमें कई परीक्षाओं की जांची गई कॉपियां का प्रधान परीक्षक पुनर्मूल्यांकन करता है। प्रधान परीक्षक देखता है कि किसी परीक्षक ने मानक से अधिक या कम नंबर तो नहीं दिए हैं। इसके बाद प्रधान परीक्षक दिए गए जवाबों के लिए नंबरों का मानक निर्धारित करता है और फिर सभी परीक्षकों को उसी आधार पर नंबर देना होता है। सीबीआई ने जांच में पाया कि मॉडरेटर्स की ओर से जो रिपोर्ट दी गई, उसमें मनमानी हुई। कुछ अभ्यर्थियों की कॉपियों का ही मॉडरेशन हुआ और बाकी के बारे में रिपोर्ट में कोई जानकारी नहीं दी गई।

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