[azamgarh] - साम्राज्यवादी शक्तियों के आगे नहीं झुके कार्लमार्क्स

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आजमगढ़। सामाजिक कारवां रैदोपुर कार्यालय पर शनिवार को वैज्ञानिक, समाजवाद के प्रवर्तक कार्लमार्क्स की 200वीं जयंती पर कामरेड बैजनाथ की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। डा. बीएन गौंड ने कहा कि कार्ल मार्क्स पूंजीवादी, साम्राज्यवादी ताकतों के आगे कभी नहीं झूके। उनकी इसी क्रांतिकारी विचारधारा के कारण ही उनको उनके देश जर्मनी से निकाल दिया गया। कामरेड जय प्रकाश नारायन ने कहा कि मार्क्सवाद का प्रचार-प्रसार जितना उनके जीवन काल में हुआ उससे अधिक उनके उनके मरने के बाद हुआ। आज पूरी दुनिया दो भागों में बंट चुकी है। मार्क्सवादी विचारधारा और पूंजीवादी विचारधारा। वशिष्ठ सिंह ने कहा कि मानव समाज का विकास वर्ग संघर्षो की देन है। संघर्ष के सिंद्धांत की खोज कार्लमार्क्स ने की। डा. रवींद्र राय ने कहा कि कार्लमार्क्स की बहुत सी पुस्तकों में कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र और पूंजी सबसे महत्वपूर्ण है। कार्लमार्क्स ने घोषणा पत्र में लिखा है कि दुनियां के मजदूर एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास रखने के लिए कुछ भी नहीं है। गोष्ठी में अनिल चतुर्वेदी, इंद्रासन सिंह, अवधेश, अनीस, शिवधन यादव, अरविंद विश्वकर्मा, राकेश आदि शामिल रहे। इसी क्रम में तहबरपुर संवाददाता के अनुसार जनमुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में शनिवार को खादारामपुर प्राथमिक विद्यालय के परिसर में कार्लमार्क्स की 200वीं जयंती पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कामरेड रामकरन राम ने कहा कि मार्क्स महज किताबी दार्शनिक नेता नहीं थे। वे मजदूरों के आंदोलन से जुड़े रहे। उनके लेखन और मजदूरों के लिए किए गए संघर्ष ने मजदूरों को मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। जनमोर्चा के संयोजक राजेश ने कहा कि 21वीं सदी के भारत में शोषक वर्ग द्वारा मार्क्सवाद के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा है कि मार्क्सवाद पुराना पड़ चुका है। कामरेड उदयभान ने कहा कि भारत में फासीवाद हमलों की बड़ी वजह वित्तीय संकट है। इस मौके पर राजकुमार, आलम, कोमल, रामकिशुन, श्रीराम, ललसू, बलदेव सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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