[basti] - कुआनो के अस्तित्व पर संकट

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बस्ती।

साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाओं में ‘लाडली’ की संज्ञा पा चुकी कुआनो का वजूद संकट में है। गंदे नाले और कचरे ने पहले ही जलीय जंतुओं को नेस्तनाबूद किया। अब जलीय वनस्पतियां इस नदी का अस्तित्व मिटाने पर आमादा हैं। अतिक्रमण के अलावा दुश्मन कही जाने वाली जलकुंभी इस वक्त वजूद खत्म करने पर आमादा है।

बहराइच जिले के बसऊपुर में एक नाले के रूप में बहने वाला जल स्रोत बलरामपुर जिले में पहुंचते-पहुंचते नदी का रूप ले लेता है। पूरब की दिशा में बढ़ते ही बस्ती में कुआनो नदी बन जाती है। जिले में प्रवाह 50 किलोमीटर का है। इसमें 30 किलोमीटर खुला क्षेत्र है जबकि 20 किलोमीटर वन क्षेत्र के तहत आता है। जिले में ही लालगंज में मनोरमा नदी में इसका संगम हो जाता है। इस नदी का रहस्य जमीन के अंदर से निकलने वाले वे हजारों छोटे-छोटे जलस्रोत हैं जो नदी में के रूप में बहने के लिए जल देते हैं। रहस्य यह कि नदी का कोई उद्गमस्थल नहीं है। फिर भी इस नदी से जनभावनाएं जुड़ीं हैं।

जन भावनाओं के कारण ही अमहट घाट पर भव्य कुआनो आरती जैसे आयोजन होने लगा है। पिछले वर्ष नगरपालिका के प्रस्ताव पर पूर्व की सरकार ने करीब सात करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। इस धनराशि से कुआनो नदी के अमहट घाट का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। कुआनो को बचाने और इसे प्रदूषण मुक्त करने की चित्रांश क्लब, हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने कुआनो बचाओ आंदोलन के जरिये लंबी लड़ाई लड़ी लेकिन नतीजा शून्य ही है। नदी के किनारों पर अतिक्रमण कर खेती भी की जा रही है।

समाजसेवी ने शुरू कराया था स्वच्छता अभियान

लालगंज स्थित उद्दालक मुनि की तपोभूमि से होकर गुजरने वाली कुआनो की सर्फाई के लिए दो साल पहले ग्राम प्रधान रामदौर चौधरी ने अभियान चलाया था। घाट की सफाई का कार्य हुआ। इसके बाद न तो कोई स्वयं सेवी संगठन और न ही सामाजिक कार्यकर्ता सफाई के लिए आगे आए। क्षेत्र के अनुराग पाल राजन ने बताया कि यहां चैत्र पूर्णिमा पर मेला लगता है। कुआनो और मनोरमा नदी का संगम स्थल है। फिर भी नदी की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं। जबकि मान्यता है कि इस स्थल पर स्नान, दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वीरेंद्र कुमार का कहना है कि कुआनो का सफाई अभियान हर महीने चलाया जाना चाहिए।

धोबी घाट सूना, नदी में बह रही गंदगी

कुआनो नदी को गंदगी से बचाने के लिए नगर पालिका ने लाखों रुपये खर्च कर धोबी घाट का निर्माण कराया, मगर व्यवस्थागत खामियों के चलते धोबी घाट के लिए बनाए गए डैम सूखे हैं। इसमें पानी न होने के कारण कपड़ों की सफाई नदी में ही की जा रही है। ऐसे में नदी में ही गंदगी व साबुन का पानी बहाया जा रहा है। इससे नदी के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।

बोले डीएफओ

प्रभागीय वनाधिकारी केडी सिंह कुआनो के जीर्णोद्धार को रेखांकित करते हैं। कहते हैं कि नदी के हालात से महकमा वाकिफ है। नदियों को लेकर तंत्र संजीदा है तो विभाग भी पीछे नहीं है। जन सहयोग से पौधरोपण की योजना चलाई जा रही है। नदी के अस्तित्व को बचाने को लेकर विभाग चिंतित है। नदी को नया जीवन देने के लिए उसमें जमा सिल्ट निकलवानी जरूरी है। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। नदी के जीर्णोद्धार का प्रयास शुरू हो गया है।

बोले डीएम

डीएम सुशील कुमार मौर्य कहते हैं कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चल रहा है। इसके तहत कार्रवाई के बाद अब नदी के किनारों को भी अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। नदी को नया जीवन देने के लिए भी संबंधित विभागों से वार्ता की जाएगी। इसके अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन पूरी सतर्क है।

कुआनो के अस्तित्व पर बोले लोग

अस्तित्व बचाने को सबकी पहल जरूरी : प्रवीण

सदर ब्लॉक के वाराह क्षेत्र निवासी प्रणवीर सिंह कुआनो नदी को बचाने के लिए सबके पहल को जरूरी करार देते हैं। कहते हैं कि नदी में जो लोग रासायनिक पानी गिरा रहे हैं सबसे पहले उन्हें इसकी चिंता होनी चाहिए कि बगैर पानी जीवन नहीं है। यही नहीं तमाम संगठन कुआनो को बचाने का दम भर जरूर रहे हैं, मगर अब कुआनो पर राजनीति के बजाय उसके बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

रोजी-रोटी से जुड़ी है कुआनो : दिलीप

भुअर सराय निवासी दिलीप कुमार कहते हैं कि सदियों से कुआनो का अस्तित्व यहां है। इस नदी से तमाम की रोजी जुड़ी है तो नदी के पानी से धरती की प्यास बुझाकर फसल पैदा की जाती है। यानी रोजी और रोटी कुआनो से जुड़ी है। कुआनों मां है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। यदि नदी का अस्तित्व नहीं रहा तो कल कितना भयावह होगा, इसकी कल्पना से ही रूह कांप जाती है। नदी को बचाने की कोशिश समय रहते शुरू हो जानी चाहिए।

जल है तो कल है : डॉ. नवीन

योग चिकित्सक डॉ. नवीन सिंह कुआनो को लेकर बेहद चिंतित हैं। कहते हैं कि प्राकृतिक संसाधनों से ही जीवन है। वन हो या फिर नदी दोनों जीवन के लिए जरूरी हैं। कुआनों के हालात अच्छे नहीं हैं। इसे बचाने के लिए शासन, सरकार, जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र को आगे आना चाहिए। क्योंकि सभी जानते हैं कि नदी का अस्तित्व बचाने की जरूरत आ पड़ी है। क्योंकि जल है तो कल है। कल बचाने के लिए आज को बेहतर बनाना होगा।

कुआनों मे सिल्ट ने बढ़ा खतरा : देवेंद्र

अधिवक्ता देवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि आएदिन तमाम संगठन नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं, मगर यह कैसे बचेगा इस पर कोई बयानबाजी नहीं होती। इसका पूरा अध्ययन जरूरी है। नदी को नया जीवन देने के लिए इसमें वर्षों से जमी सिल्ट हटाई जानी जरूरी है। सिल्ट हटेगी तो नदी का जल स्रोत खुल जाएगा और गहराई भी बढ़ जाएगी। नदी उथली हो चुकी है। इस कारण इसका प्रवाह थम गया है। इस पर अभी से ही पहल होनी जरूरी है।

कुआनो के पास से प्रशासन ने हटवाया अतिक्रमण

शहर से सटे चांदमारी स्थित दो एकड़ जमीन पर वर्षों से हुए अतिक्रमण पर शनिवार को प्रशासन की जेसीबी ने धावा बोल दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर चंद्रमोहन गर्ग ने यहां तीन थानों की फोर्स के साथ पहुंच कर अतिक्रमण हटवा दिया। वहां बनाई गई दीवार आदि गिरवा दी गई। दो घंटे की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद जमीन को प्रशासन का बताते हुए वहां चिहंकन कर पिलर स्थापित करा दिया गया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह कार्रवाई जनहित में है। इस जमीन पर सुंदरीकरण का कार्य होगा। बगल में बह रही नदी के अस्तित्व के लिए भी यह जमीन उपयोगी है। जिस जमीन पर अतिक्रमण था, वह प्रशासन का है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

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