[ghazipur] - भूमिहीन की भूमि भी कर दी गई समतल

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करंडा। विकासखंड के माहेपुर गांव में पांच वर्ष में विकास के नाम पर लाखों रुपये की हुई गोलमाल में जांच के दौरान एक और मामला प्रकाश में आया है। भूमिहीनों की भूमि भी मनरेगा के तहत समतल कर दी गई और करीब 35 से 40 लाख रुपये उतार लिए गए। यही नहीं गांव में पौधरोपण और ट्री-गार्ड के नाम पर एक लाख से ऊपर धन उतार लिया गया। जबकि जमीनी तौर पर कोई कार्य ही नहीं हुआ है। वर्तमान ग्राम प्रधान हवलदार चौधरी ने बताया कि बलिराम राम के पास एक धुर भी जमीन नहीं है लेकिन उनकी भूमि को समतल करने के नाम पर वित्तीय वर्ष 2011-12 में मनरेगा के तहत पैसा उतार लिया गया। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2014-15 में रामश्रय, वित्तीय रवर्ष 2013-14 में कांता, वित्तीय वर्ष 2011-12 में रामशीष और 2012-13 में उदय के खेत के समतलीकरण के नाम पर लाखों रुपये उतार लिए गए। जबकि जमीनी हकीकत के तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह बदन सिंह के खेत से अमेरिका के खेत तक मेढ़बंदी के नाम पर 64 हजार 70 रुपये उतार लिए गए लेकिन कोई कार्य नहीं किया गया। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2010-11 और 2011-12 में गणेश, मनोज सहित अन्य लोगों के खेतों की मेढ़ पर पौधरोपण और ट्री-गार्ड कागजों में दिखाया गया। कागजों में ही पेड़ लगे और ट्री गार्ड लगाकर एक लाख दस हजार 910 रुपये उतार लिए गए। ग्राम प्रधान ने बताया कि जांच टीम की ओर से जांच करने से अपना गला फंसता देख ब्लाक के कर्मचारी और अधिकारी घर तक दौड़ लगाकर बचाने की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच में काफी धन गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में डीएम के बालाजी ने बताया कि मामले की जांच टीम से कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

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