[mau] - डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है सदर अस्पताल

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मऊ। जिला अस्पताल के ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों का इलाज सही तरीके से नहीं हो पाता है। मरीजों को दिनभर भटकने के बाद बैरंग वापस लौटना पड़ता है। गर्मी में सामान्य दिनों की अपेक्षा ओपीडी मरीजों की भीड़ ज्यादा रहती है, लेकिन मरीजों के अनुपात में डॉक्टरों की संख्या बहुत ही कम है। कई बार इलाज न मिलने पर इस समस्या को लेकर मरीज और उनके परिजन अस्पताल प्रशासन से शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इसके बावजूद डाक्टरों की तैनाती के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के सृजित पद 28 की तुलना में महज 15 डॉक्टर ही तैनात हैं। जबकि जिला अस्पताल के ओपीडी में रोजाना औसतन 600 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों का हाल बेहाल हो जाता है। दूसरी ओर इलाज की आस में दूर दराज इलाकों से आये सैकड़ों मरीजों को कतार में दिन भर धक्के खाने के बाद भी बिना इलाज कराये बैरंग वापस लौटना पड़ता हैं। बताते चलें कि अस्पताल में फिजीशियन के लिए तीन पद स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ एक की तैनाती है। जबकि एमबीबीएस एमडी के स्वीकृत तीन पद के सापेक्ष यहां एक ही की तैनाती हो सकी है। इसी तरह से दो एमडी मेडिसिन के पद रिक्त है। वहीं कार्डियोलाजिस्ट का एक पद है, वह कई सालों से रिक्त है। चिकित्सकों की कमी के चलते वर्तमान में ओपीडी में दो सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, दो आर्थो सर्जन, दो बालरोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन द्वारा ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शनिवार को कोपागंज से आई सुनीता देवी, घोसी के बड़ा बाजार निवासी मंजू देवी, इंदारा से आए अनिल राजभर सहित कई मरीजों ने बताया कि चेस्ट संबंधित परेशानी होने पर वह अस्पताल आए थे, लेकिन डाक्टर के न होने से इलाज नहीं मिल पाया। इस बाबत सदर अस्पताल के अधीक्षक डा. बृजकुमार का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अस्पतालों पर शासन से प्रदत्त सभी सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।

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