[rohtak] - जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने किया पहला घुटना प्रत्यारोपण

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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने किया पहला घुटना प्रत्यारोपणफोटो सहित एसएनजे 2संजय कुमाररोहतक। शहरवासियों को अस्थि रोग विभाग की सामान्य समस्याओं के अलावा घुटना प्रत्यारोपण जैसी समस्या से निजात पाने के लिये महंगे निजी अस्पताल और पीजीआईएमएस जैसे बडे़ संस्थान के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। क्योंकि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने अपने आपरेशन थियेटर में पहली बार सफल घुटना प्रत्यारोपण किया है। जल्द ही मरीज को डॉक्टर छुट्टी दे देंगे और फिजियोथैरेपी सर्विस के बाद मरीज अपना सामान्य जीवन जी सकेगा।जिला अस्पताल में एनेस्थिसिया विभाग और अस्थि रोग विभाग की टीम ने झज्जर की मदानकलां निवासी संतोष को घुटनों के दर्द से निजात दिलाई है। 70 वर्षीय संतोष पिछले चार साल से बांये घुटने के दर्द से परेशान थी। उनका घुटना पूरी तरह घिस गया था। जब वह जांच के लिए जिला अस्पताल रोहतक आई तो डॉ. शरणजीत सिंह चौहान ने उनकी जांच की और घुटना बदलवाने की सलाह दी। डॉ. चौहान ने बताया कि उनके साथ डॉ. हरविंद्र, डॉ. सौरभ व एनेस्थिसिया विभाग से डॉ. नरेश दहिया, डॉ. अजय सिंह व ओटीए नरेंद्र, नानक व रमेश शामिल रहे। पूरी सर्जरी डेढ़ घंटे में पूरी की गई, इसके लिए मरीज को स्पाइनल एनेस्थिसिया दे कर कमर के नीचे के हिस्से को सुन्न किया गया था। मरीज को आपरेशन के एक दिन बाद ही चलने को कह दिया गया था। एक्सपर्ट ने बताया कि मरीज का घुटना प्रत्यारोपण सरकार के रेट लिस्ट के अनुसार जारी मापदंड़ों के अनुसार किया गया है। इसमें एक घुटने की कीमत 75700 रुपये आई है। इसमें स्मिथ नेफ्यू और हड्डी में मिक्स होने वाली ब्लू सीमेंट का प्रयोग किया गया है। इस घुटने की समय अवधि 15 से 25 साल होती है। अस्थि रोग विभाग की इस कामयाबी पर हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जसबीर परमार ने बधाई दी है। डॉ. परमार ने कहा कि घुटना प्रत्यारोपण बड़ी बात नहीं है, लेकिन जिला अस्पताल में होना बड़ी बात है। इससे साधारण लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। फिजियोथैरेपी की मशीनों की खल रही कमीजिला अस्पताल में ऑर्थो सर्जनों ने घुटना प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा। लेकिन अब इसमें समस्या यह आ रही है कि अस्पताल में फिजियोथैरेपी की मशीन नहीं है। यहां फिजियोथैरेपिस्ट तो है। इसलिये मरीज को फिजियोथैरेपी के पीजीआईएमएस जाना पड़ सकता है। हालांकि जिला अस्पताल के डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि वह इसकी व्यवस्था यहीं करवा देंगे।

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