[sitapur] - कोटेदारों के बनेंगे फॅूड लाइसेंस

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डीएम के निर्देश पर शुरू हुई कवायदसीतापुर। सरकारी गल्ले की दुकान चला रहे कोटेदारों को अब फूड सेफ्टी का लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस के वह कारोबार नहीं कर सकेंगे। इससे एक तो लाइसेंस की तादाद बढ़ेगी वही कोटेदारों के यहां से खाद्य पदार्थों के नमूने भी संग्रहीत किए जाएंगे। डीएम के निर्देश पर एफएसडीए ने कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से किसी भी खाद्य पदार्थ की बिक्री, भंडारण व निर्माण करने पर पंजीकरण व लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। इसके बिना कारोबार करना अवैध है। पकड़े जाने पर कार्रवाई भी होती है। विभाग के मुताबिक, सालाना 12 लाख से ऊपर का टर्नओवर करने वालों का लाइसेंस बनता है। जबकि इससे कम खर्च करने वालों का पंजीकरण होता है। अभी तक कोटेदार बिना फूड लाइसेंस के कारोबार कर रहे हैं। डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीओ ने कोटेदारों के लाइसेंस बनवाने का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि कोटेदार भी खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं।इसकी निगरानी बहुत ही आवश्यक है। साथ ही गुणवत्ता की चेकिंग के लिए इसके नमूने भी लिए जा सकते हैं। इस पर डीएम ने डीएसओ को निर्देश दिए हैं कि वह अपने यहां के कोटेदारों का लाइसेंस बनवाना सुनिश्चित करें। वहीं खाद्य विभाग ने लाइसेंस बनवाने को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है।दी जा चुकी है जानकारीकोटेदारों के फूड लाइसेंस बनवाने जाएंगे। खाद्य रसद एवं आपूर्ति विभाग को लाइसेंस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जा चुकी है। इससे कोई कोटेदार अछूता नहीं रहेगा।-अरविंद कुमार यादव, अभिहित अधिकारी

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