[varanasi] - काशी में पनपेगी ब्रज की ‘सांझी’, होगा अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप का आयोजन

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कलानिधि कहे जाने वाले श्रीकृष्ण और उनकी प्रियतमा श्रीराधा को जोड़ने वाली सांझी कला को काशी से जीवंत करने का प्रयास हो रहा है। पांच हजार साल पुरानी विलुप्त हो रही इस कला की परंपरा को काशी में देश और विदेश के कलाकार एक साथ मिलकर नया स्वरूप देंगे।

ब्रज के सांझी कलाकार सुमित गोस्वामी के निर्देशन और क्रिएटिव फोरम के राजकुमार सिंह के संयुक्त तत्वावधान में काशी में सांझी कला पर जून में अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप का आयोजन किया जाएगा। वर्कशाप के माध्यम से लोगों को सांझी कला की बारीकियां और इतिहास से रूबरू कराएंगे।

क्रिएटिव फोरम के कलाकार राजकुमार सिंह ने बताया कि सांझी देखने में भले ही रंगोली जैसी लगती है, लेकिन इसका महत्व कहीं ज्यादा है। श्रीकृष्ण के प्रति श्री राधा के प्रेम का प्रतिबिंब है सांझी।

शाम के वक्त श्रीकृष्ण जब राधा से मिलने आया करते थे, वह उन्हें रिझाने के लिए फूलों से तरह-तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं। जब श्रीकृष्ण गोकुल छोड़कर चले गए, तब भी श्रीराधा उनके साथ बिताए गए पलों की याद में इस तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं। यह कला अब लुप्त हो रही है और इसको बढ़ावा देने के लिए काशी से प्रयास किया जा रहा है।

पहले तो यह कला मंदिरों तक सिमटी और अब आलम यह है कि ब्रज में भी श्री राधा रमण मंदिर ही ऐसा है, जहां पर सांझी बनाई जाती है। इस मंदिर के पुजारी वैष्णवाचार्य सुमित गोस्वामी एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जो इस कला को बनाते हैं और इसे बचाने के लिए अपने स्तर पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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