[varanasi] - मंदिरों की रक्षा के लिए असि से वरुणा तक होगा आंदोलन0

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वाराणसी। काशी के प्राचीन मंदिराें को बचाने के लिए असि संगम से वरुणा संगम तक आंदोलन किया जाएगा। विकास की आड़ में शिव की नगरी के मूल स्वरूप और चरित्र को विकृत करने का यह प्रयास निंदनीय है। वर्तमान सरकारों ने काशी को नया स्वरूप देने का जो निर्णय लिया है उससे पक्का महाल का स्वरूप विद्रूप हो जाएगा। उक्त बातें शंकराचार्य के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में बातचीत के दौरान कहीं।उन्होंने बताया कि मंदिर बचाओ आंदोलनम न्यास के तहत सात मई से असि संगम से वरुणा संगम तक की यात्रा के माध्यम से आंदोलन का श्रीगणेश होगा। इसके बाद अगले आठ दिन तक रोजाना अलग-अलग घाटों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसी क्रम में 16 मई से काशी यात्रा आरंभ कर लोगों को जागरुक किया जाएगा और यात्रा का समापन 29 मई को होगा। आंदोलन के अगले चरण की घोषणा उसी दिन की जाएगी।उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह काशी के लोगों को पूरी योजना से अवगत कराएं और उनकी आपत्तियों का निस्तारण करें। आज तक इस योजना को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे यह आशंका हो रही है कि शायद कुछ गोपनीय हो रहा है। मंदिर परिक्षेत्र की संपत्तियों की रजिस्ट्री बाबा विश्वनाथ के नाम पर कराई जाएं।भाजपा ने कर्नाटक में अपने घोषणापत्र में कहा है कि यदि वे सरकार में आए तो मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप बंद करेंगे। इस घोषणा को काशी में भी चरितार्थ किया जाए। निर्ममता से तोड़े गए मंदिरों का पुनर्निमाण हो और ताले में बंद दुर्मुख विनायक की पूजा शीघ्र कराई जाए। व्यासपीठ और मंडन मिश्र के ऐतिहासिक स्थान को व्यास परिवार को ससम्मान वापस किया जाए। इसके साथ ही सरकार काशी के अन्य मंदिरों को नहीं तोड़ने का लिखित आश्वासन भी दे।

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