[almora] - सीएम के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं हुआ विस्थापन

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अल्मोड़ा। विस्थापन के इंतजार में सालों बीत गए हैं, लेकिन सरकार जिले के आपदा प्रभावित 14 गांवों के 242 परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं करा सकी है जबकि गत 24 नवंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिले से दो अत्यधिक संवेदनशील गांवों के प्रभावित परिवारों की सूची भी तलब की थी, लेकिन इसके बाद भी इस मामले में शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।2010 में भीषण आपदा आने से जिले में विभिन्न स्थानों पर 36 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों की संख्या में जानवर मारे गए थे। कई गांव भूस्खलन की चपेट में आए थे। अल्मोड़ा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत भैंसियाछाना के तोक खैरखेत में छह, बूढ़ाधार के 50 परिवारों के अलावा अन्य ब्लॉकों में ग्राम पंचायत बल्टा के 28, बल्टाबाड़ी के चार, सिराड़ के 14, देवली के छह, भूल्यूड़ा के चार, मालता के तीन, बजेठी के 10 परिवार आपदा प्रभावित घोषित हैं। फिर 2013 में आपदा ने पुन: कहर ढाया। अल्मोड़ा तहसील के ल्वेटा में 15 परिवार, थालागूंठ में नौ परिवार, सल्ट तहसील के रड़गाड़ के छह, पनुवाद्योखन के 14, बसरखेत चौखुटिया के 13, इंदिराबस्ती रानीखेत के 42 परिवारों के मकान भूस्खलन की चपेट में हैं। इन परिवारों का पंचायत घरों, स्कूलों, किराए के मकानों में रहना मजबूरी है। आपदा प्रभावित परिवार कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिला प्रशासन ने इन गांवों के निकट ही आपदा प्रभावित परिवारों के लिए भूमि चयनित कर प्रस्ताव शासन को भेजे हैं। गत 24 नवंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री रावत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जिले के दो अत्यधिक संवेदनशील गांवों के प्रभावित परिवारों की सूची जिला प्रशासन से मंगाई थी, लेकिन सीएम के हस्तक्षेप के बाद भी इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। इधर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि बूढ़ाधार के प्रभावितों के विस्थापन को वन भूमि का प्रस्ताव नोडल कार्यालय देहरादून भेजा गया है, जबकि बल्टा में प्रभावित परिवारों ने कच्चे मकान बना लिए हैं जबकि इस गांव के कुछ परिवार विस्थापन नहीं चाहते। सीएम के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई14 गांवों के 242 परिवारों को विस्थापित नहीं कर सकी सरकार

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