[azamgarh] - नौकरी वाले भी ले रहे मनरेगा का भुगतान

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मनरेगा के तहत पात्रों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करा रहा है। एक तरफ प्रशासन जहां मानव दिवस सृजन के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहा है। वहीं, मृत और नौकरी वालों को भी मनरेगा के तहत रोजगार देकर भुगतान किया जा रहा है। अब मृत जाब कार्ड धारकों के भुगतान से लाभान्वित कौन हो रहा है, इसे आसानी से समझा जा सकता है। लाटघाट संवाददाता के अनुसार हरैया ब्लाक के बजाबारी निवासी लालमती (यूपी-57-005-068-022/263) की मौत 13 अप्रैल 2015 को हुई थी। इसकी पुष्टि खतौनी से भी हुई है। इसके बाद भी विभागीय रिकार्ड के अनुसार इन्होंने 10 अप्रैल से आठ मई 2015 तक 25 दिन मनरेगा के तहत कार्य किया। 14 मई से 19 जून 2015 तक फिर 32 दिन का काम मिला। 20 जून से दो जुलाई 2015 तक 12 दिन का काम मिला। इसके बाद तीन जुलाई से नौ जुलाई 2015 तक फिर छह दिन, 15 अक्तूबर से 15 नवंबर 2015 तक 28 दिन, सात मई से सात जून 2016 तक 28 दिन, 22 मई से 20 जून 2017 तक 26 दिन, 21 जून से 20 जुलाई 2017 तक 26 तक मजदूरी करती रहीं। मरने के बाद भी महिला 183 दिन मजदूरी करती रही। इसका भुगतान भी किया गया है। लालमती के पट्टीदार शेषनाथ राय और कुंवर बहादुर राय ने बताया कि लालमती और उसके पति तारकेश्वर की मृत्यु काफी पहले हो चुकी है। दोनों का कोई पुत्र भी नहीं है। लड़कियां थीं, जो शादी कर घर जा चुकी हैं। अब महिला के मरने के बाद 183 दिन का भुगतान किसने लिया है, इस सवाल ने बीडीओ, एपीओ, जेई, सेक्रेटरी और प्रधान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरैया ब्लाक के इस गांव में यह को पहला मामला नहीं है। ऐसे कई और मामले हैं जिसके माध्यम से गबन को अंजाम दिया गया है। इस संबंध में हरैया ब्लॉक के एपीओ निर्भय राय से पूछताछ की गई तो कह दिया कि इसकी जानकारी नहीं दी जाती। बीडीओ संगम सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी की जाएगी।000000 मिलीभगत से हुआ फर्जीबाड़ा लाटघाट। हरैया ब्लॉक में कुल 85 ग्राम सभाएं हैं। ब्लॉक के कर्मचारियों की मिलीभगत से मनरेगा, 13वें वित्त, 14वें वित्त में काफी घपला हुआ है। अगर गंभीरता से जांच कराई जाए तो कइयों के फंसने की नौबत आ जाएगी। बैजाबारी गांव के पोखरी खुदाई और मनरेगा में मृतक काम करने की बात को लेकर गांव के ही मोहन यादव ने हाईकोर्ट में मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में ब्लाक के बीडीओ को हाईकोर्ट ने तलब भी किया है। 000000000 ज्वाइंट खाते में डाल दिया भुगतान आजमगढ़। सगड़ी तहसील के ही हरैया ब्लाक के गांव करखिया रुस्तम सराय में शिकायत के आधार पर समाज कल्याण अधिकारी और एसडीएम सगड़ी की ओर से की गई जांच में पता चला था कि गांव निवासी दिलीप कुमार गांव का स्थायी निवासी नहीं है। वल्दियत और जाति भी फर्जी है। वो किसी के यहां नौकरी करता है। फिर भी तत्कालीन प्रधान ने 2014 में उसका जॉबकार्ड बना दिया। यही नहीं दिलीप के साथ काशी गोमती ग्रामीण बैंक चांदपट्टी में खोले गए ज्वाइंट खाते (111552010001195) से फर्जी करीके से 10.50 लाख का मनरेगा मजदूरी का भुगतान भी निकाल लिया गया। जबकि ज्वाइंट काते में मनरेगा मजदूरी का भुगतान हो ही नहीं सकता है। तहसील से उसे एसटी का जाति प्रमाण-पत्र जारी था। जॉब कार्ड में उसकी जाति अदर बैकवर्ड दिखाई गई थी। इसके अलावा गांव में इस तरह के कई और फर्जीवाड़े किए गए हैं। फर्जीवाड़े में आरोपियों के साथ-साथ सेक्रेटरी और लेखपाल को भी दोषी बताया गया था। कार्रवाई की संस्तुति दोनों अधिकारियों ने की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 000000000000 अभी प्रकरण संज्ञान में नहीं आया था। यदि ऐसा हुआ है तो पूरे मामले की जांच होगी। जांच में जो भी दोषी होगा, उस पर नियमानुसार कार्रवाई और रिकवरी होगी। डीडी शुक्ल, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी

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