[bihar] - बिहार में भाजपा से मुकाबले के लिए दलितों को लुभाने में जुटा राजद

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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अगले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में भाजपा से मुकाबले के लिए दलित मतदाताओं को लुभाने जुट गया है। राजद भगवा पार्टी से किनारे किए गए दलित नेताओं को साधने में लगा है। बिहार के पूर्व सीएम और एनडीए से अलग हो चुके जीतन राम मांझी पहले ही राजद के साथ आ चुके हैं।

मांझी का कहना है कि केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार से दलित समुदाय के लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। अन्य दलित नेता और बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने भी हाल ही नीतीश कुमार का साथ छोड़ा है। चौधरी ने भी लालू के नेतृत्व वाले राजद को समर्थन देने की घोषणा की है।

संयोग है कि चौधरी और मांझी विरोधी नेता रहे हैं और अब दोनों ही राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ हैं। इस गठबंधन में कांग्रेस भी शामिल है। इस मौजूदा घटनाक्रम को राज्य में दलितों के भाजपा विरोधी मूड के रूप में देखा जा रहा है। राजद प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा, ‘नेता जमीनी स्तर पर हो रहे बदलाव का अनुकरण कर रहे हैं। मैं यह कह सकता हूं कि बिहार में 70 फीसदी दलित राजद के साथ हैं।

वहीं भाजपा का कहना है कि मांझी और चौधरी का प्रभाव काफी सीमित है। एक एनडीए नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि राज्य में दलितों का समर्थन अभी भी नीतीश कुमार के साथ हैं। जबकि राम विलास पासवान अभी भी दलितों के निर्विवाद नेता हैं।

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