[deoria] - नकल माफिया पर कड़ी चोट की तैयारी

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देवरिया। भटनी के दो कॉलेजों में सामूहिक नकल के भंडाफोड़ के बाद आसपास के कुछ अन्य कॉलेजों पर भी एसटीएफ की नजर है। वहां होने वाली आगामी परीक्षाओं में नकल रोकने और इस रैकेट से जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए एसटीएफ तैयारी कर रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो एसटीएफ टीम ने नकल माफिया के रैकेट की कमर तोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। टीम पेपर लीक कांड की जड़ें भी इसी क्षेत्र में मान रही है।

पेपर लीक कांड के बाद देवरिया जिले के कॉलेज गोरखपुर यूनिवर्सिटी और एसटीएफ के निशाने पर हैं। इसमें भी भटनी और आसपास के कॉलेजों पर विशेष नजर है। एसटीएफ ने इन कॉलेजों के पिछले कई वर्षों के रिजल्ट की पड़ताल भी शुरू कर दी है। 90 से 100 प्रतिशत तक रिजल्ट देने वाले कॉलेजों पर शक सबसे ज्यादा है। माना जा रहा है कि इन कॉलेजों में नकल का खेल काफी पुराना है। व्यवस्था में बदलाव के साथ इन्होंने नकल का ट्रेंड भी बदला है। पहले इमला बोलकर नकल कराई जाती रही तो अब सीधे सॉल्वर बुलाकर परीक्षा कक्ष में ही कॉपी हल करा दी जाती है।

रामगुलाम राय पीजी कॉलेज व बहादुर यादव मेमोरियल कॉलेज में छापेमारी के दौरान इसका खुलासा भी हो चुका है। नकल के इस सुनियोजित खेल को रोकने के लिए एसटीएफ टीम रणनीति बनाकर काम कर रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो भटनी व आसपास स्थित करीब डेढ़ दर्जन कॉलेजों की निगरानी शुरू हो गई है। आगामी परीक्षाओं में एसटीएफ टीम यहां भी धमक सकती है। टीम यह भी देख रही है कि कहीं कॉलेजों में पंजीकृत परीक्षार्थियों के केंद्रों की अदला-बदली तो नहीं की गई है। एसटीएफ के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नकल माफिया को इस बार करारी चोट देने की पूरी कोशिश है, जिससे वह दोबारा छात्रों का भविष्य बर्बाद करने की सोच भी न सकें। भटनी के दोनों कॉलेजों पर कार्रवाई की पूरी रिकार्डिंग भी तैयार कराई गई है, जो कॉलेज संचालकों की कलई खोल देगी। इसे महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में कोर्ट में पेश किया जाएगा।

छापे की सूचना पर रोक दिया रास्ता

चार मई को एसटीएफ की टीम पहले रामगुलाम राय पीजी कॉलेज पर पहुंची। वहां काफी मात्रा में नकल सामग्री व सॉल्वर के पकड़े जाने पर टीम पास स्थित बहादुर यादव मेमोरियल पीजी कॉलेज की तरफ बढ़ी। तब तक दूसरे कॉलेज में इसकी सूचना पहुंच गई थी। लिहाजा आनन-फानन में कॉलेज तक जाने वाले खड़ंजा मार्ग पर आड़े-तिरछे कई बाइक खड़ी कर दी गई, ताकि टीम आसानी से न पहुंच सके। दूर-दूर तक बाइक स्वामी नदारद थे। कुछ देर हॉर्न देने के बाद भी जब कोई नहीं पहुंचा, तब टीम के सदस्यों ने खुद वाहन से उतरकर बाइक हटाकर रास्ता बनाया। इस बीच कॉलेज में नकल सामग्री को लाइब्रेरी में बंद कर ताला लगा दिया गया था। एसटीएफ ने जब उसकी चाभी मांगी तो विवशता जता दी गई। बाद में एसडीएम के निर्देश पर ताला खोलकर अंदर से नकल सामग्री का जखीरा बरामद किया गया।

चंद वर्षों में बढ़ी कॉलेज संचालकों की हैसियत

भटनी के जिन दो कॉलेजों में सामूहिक नकल का पर्दाफाश हुआ है, उनके संचालकों की हैसियत कुछ ही वर्षों में तेजी से बढ़ी है। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो आठ-दस वर्ष पूर्व तक एक कॉलेज संचालक सिर्फ बाइक से चलते थे, मगर कॉलेज खोलने के बाद कई लग्जरी गाड़ियों के मालिक बन गए। अचल संपत्ति भी बढ़ी है। कई नए कॉलेज खोले गए। जांच टीम इन तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

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