[fatehpur] - चालक की झपकी से चली गई तीन जान

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फतेहपुर। नेशनल हाईवे-दो पर इलाहाबाद से आ रही रोडवेज बस रविवार की भोर ओवरटेक करने में ट्राला से रगड़ती चली गई। परिचालक साइड के परखचे उड़ गए। ऐसे में आरोप लग रहा है कि चालक को झपकी आ जाने से यह हादसा हुआ। हादसे में तीन लोगों की जान गई है। मृतक के परिवार के लोग चालक पर आरोप लगा रहे हैं।

शाइस्ता के परिजन भी उसी बस में सवार थे। परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस में बताया कि चालक बस को तेज रफ्तार में चला रहा था। उसकी रास्ते में कई बार बस लहराई थी। लग रहा था कि उसे नींद आ रही थी। रास्ते में बस रोक लेता तो शायद हादसा टल जाता। दुर्घटना के वक्त बस को कंट्रोल नहीं कर पाया। बस उसी रफ्तार से आगे चली गई। इधर, रोडवेज शाखा प्रबंधक ओपी सोनकर का कहना है कि अभी तक की पड़ताल मेें यह आशंका जताई जा रही है कि शायद चालक को झपकी आ गई। वाहन का भी तकनीकी मुआयना कराया जा रहा है।

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चालक की संविदा समाप्त

शाखा प्रबंधक ओपी सोनकर ने बताया कि वह लोग सदर कोतवाली में विभागीय एफआईआर दर्ज कराने की भी सोच रहे हैं। तकनीकी पहलू पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल संविदा चालक अमित सिंह की संविदा खत्म करने की संस्तुति कर दी गई है।

हादसे में दस घायल

शहर कोतवाली क्षेत्र के अस्ती निवासी खलील अहमद की पत्नी शाहजहां बेगम, नियाज उर्फ भुल्ले व उनकी पत्नी शाजदा बेगम उर्फ छेद्दन व बेटा इमरान, हुसैनगंज थाने के देवनार निवासी विनोद, जगदीश, राजेश, भभुआ चौराहा निवासी प्रेम, कल्यानपुर थाने के पीरनखेर निवासी राजबहादुर, नरेंद्र घायल हुए हैं।

एक साल पहले हुआ था शाइस्ता का निकाह

फतेहपुर। इस हादसे में जान गंवाने वाली शाइस्ता की कानपुर के जाजमऊ निवासी हनीफ से 12 फरवरी 2017 को शादी हुई थी। पति से अनबन होने पर मायके सदर कोतवाली के अस्ती में रह रही थी। उसे पेट में कुछ तकलीफ थी। वह जौनपुर अब्बू, अम्मी और भाई के साथ इलाज कराने गई थी। वहां से लौटते समय हादसा हुआ। शाइस्ता दो बहनों में बड़ी बेटी थी। उसके पांच भाई हैं।

नेपाल में भट्ठा मजदूरी करता था श्रीराम

हादसे में जान गंवाने वाला बोधीखेड़ा गांव का श्रीराम नेपाल प्रांत में भट्ठा मजदूरी करता था। घायलों में विनोद उसका भांजा है। विनोद, राजेश, प्रेम, जगदीश के साथ नेपाल के जनकपुर में मजदूरी करने गया था। पांच माह बाद घर लौट रहा था। मुर्दाघर में उसकी पत्नी सुदामा रो-रो कर बदहवास रही। उसके मां और पिता की मौत हो चुकी है। वही परिवार का मुखिया था। उसके तीन बेटे और एक बेटी है।

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परिचालक की दो साल पहले हुई थी शादी

बांदा जिले के जौहरपुर के रहने वाले बस कंडक्टर की दो साल पहले रीना के साथ शादी हुई थी। घटना की खबर पर वह परिवार के साथ पहुंची। पति का शव देखकर बदहवास हो गई। परिवार के लोगों ने उसे किसी तरह संभाला और वापस घर ले गए।

प्रत्यक्षदर्शी की मौत का मंजर देख कांपी रूह

हादसे के वक्त भोर के करीब चार बजे थे। इस दौरान रोडवेज बस में सवार यात्री नींद में थे। बस में यात्रियों की संख्या कम होने की वजह से सभी लोग सीट पर लेटे थे। प्रत्यक्षदर्शी विनोद ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले उसकी नींद खुली थी। वह चालक के पीछे की सीट पर बैठा था। हादसा इतना भीषण था कि उसकी रूह कांप गई। उसे लगा कि कोई भी जिंदा नहीं बचेगा। उसके ठीक सामने की सीट पर मामा राजबहादुर लेटे थे। उनका सिर और चेहरा भयावह हो गया था। जिसे देखकर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। कुछ देर बाद पुलिस और एंबुलेंस पहुंची। तब उन लोगों को बस से बाहर निकाला गया।

होटल ढाबों के पास अक्सर होते हादसे

हाईवे के मानकों को ताक पर रखकर होटल ढाबे खुले हैं। इनके आसपास अक्सर हादसे होते हैं। दरअसल इनके संचालकों के पास ट्रकों को खड़ा करने के लिए मैदान नहीं है। आसपास सर्विस लेन न होने पर ट्रक हाईवे पर ढाबों के किनारे खड़े हो जाते हैं। यहां से अचानक निकल पड़ते हैं। बस दुर्घटना में ऐसा ही मालूम हो रहा है। ट्राला का पहिया रोड पर है। जिससे प्रतीत होता है कि वह हाईवे पर एक साइड से ढाबे से निकल अचानक चल पड़ा होगा या फिर हाईवे पर ही खड़ा रहा होगा। अक्सर खड़े ट्रकों में पीछे से दूसरे वाहनों के चालक नींद आने पर जा घुसते हैं। चालकों, कंडक्टरों की बेवजह जान जाती हैं।

चालकों से ज्यादा काम लेने पर होती है घटनाएं

फतेहपुर। रोडवेज कर्मचारी संघ के जिला शाखा अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने बसों से होने वाली दुर्घटनाओं की निंदा की। साथ ही उन्होंने इसके लिए प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि चालक, परिचालकों से अधिक काम लिया जाता है। आठ घंटे के बदले 16 से 18 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। बस चलाते समय चालकों को नींद आ जाना स्वाभाविक है। साथ ही चालकों का दिमाग भी स्थिर नहीं रहता है। बसों की मरम्मत सही ढंग से नहीं की जाती है। वर्कशाप में मरम्मत के नाम पर खानापूरी होती है। इससे बसें खराब होती हैं। शाखा अध्यक्ष ने कहा कि एआरएम चालक, परिचालकों पर उत्पीड़न करते हैं। मृतक परिचालक के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए कर्मचारी संघ पूरी मदद करेगा। बस चालकों से आठ घंटे की ड्यूटी कराई जाए। कई बार तो लगातार 24 घंटा ड्यूटी करने से चालक डिस्टर्ब हो जाता है।

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