[gonda] - बैंकों ने आरबीआई से की 500 करोड़ रुपये करेन्सी की डिमाण्ड

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नकदी संकट गहराया, बैंकों ने मांगे 500 करोड़ गोंडा। जिले में कैश की किल्लत व रोजाना पैसे की मांग के दबाव में बैंक हांफ रहे हैं। कैश की किल्लत से परेशान होकर जिले के बैंकों की ओर से 500 करोड़ रुपये की मांग की है। लेकिन बैंकों की डिमाण्ड के मुताबिक रिजर्व बैंक आफ इण्डिया बहुत कम करेंसी दे रहा है। जिससे सहालग और कटाई के मौसम में लोग परेशान हो रहे हैं। भुगतान न मिलने से बैंकों में रोजाना बैंक कर्मियों व ग्राहकों में कहासुनी हो रही है। जिले के बैंकों में इस समय नोट बंदी के दौर जैसे हालात हो गये हैं। कैश की कमी व ग्राहकों की ओर से रोजाना बैंकों की डिमांड से जिले के सभी बैंक की शाखाएं हांफ रही हैं। जिले में मुख्य रूप से इलाहाबाद बैंक व स्टेट बैंक के पास करेंसी चेस्ट है। यह बैंक कई अन्य बैंकों के बैंक हैं जहां की करेंसी चेस्ट से वे कैश लेती हैं। इसके अलावा इलाहाबाद बैंक व स्टेट बैंक की खुद की करीब 175 शाखाएं हैं। बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि जिले की करेंसी को करीब 500 करोड़ रुपये की दरकार है। यह डिमांड इस समय कई बार रिजर्व बैंक आफ इंडिया को भेजी जा चुकी है। बैंकों में कैश की किल्लत का हाल यह है कि कई शाखाओं में तो ग्राहकों को कैश के लिए पूरा दिन इंतजार करना पड़ा है। कई बार ग्राहकों को लौटना पड़ा है। इस बारे में पीएनबी बैंक ग्राहक राम देव तिवारी ने बताया कि उनके घर पर शादी थी बैंक से कई बार पैसा लेने गये लेकिन पैसा न होने की बात कह कर लौटा दिया। इसी तरह से शिव प्रसाद का कहना है कि स्टेट बैंक घर बनवाने के लिए पैसा लेने गये अधिक पैसा मांगने पर बैंक कैशियर ने कैश की कमी से हाथ खड़े कर दिये। इतना ही नही जिले में लगे बैंक एटीएम का नजारा भी देखने लायक है। जिस एटीएम पर देखों नो कैश का बोर्ड लगा है। एटीएम संचालक एटीएम में कैश नही भर रहे हैं। किसी एटीएम में पैसा डाले जाने पर वहां 100 से 200 लोगों की लम्बी कतार लग जाती है। इस समय शादी सहालग का दौर चल रहा है सभी को पैसे की जरूरत है। लेकिन ग्राहकों को अपना पैसा ही नही मिल पा रहा है। वहीं इस बाबत इलाहाबाद बैंक के एजीएम अमर जीत सिंह हीरा का कहना है कि आरबीआई से वह लगातार कैश की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज की डिमांड को देखकर उन्होंने आरबीआई से बैंक की करेंसी चेस्ट को फुल करने की डिमांड की है। कई बार मेल,पत्र व फोन के जरिये रिमाइंडर भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरबीआई से डिमांड से बहुत कम रकम मिल पा रही है।

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