[mandi] - जेबीटी टेट मेरिट प्रशिक्षुओं के साथ सौतेला व्यवहार

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मंडी। जेबीटी के 700 पदों की भर्ती पर सरकार के बदलते फैसलों का खामियाजा टेट मेरिट प्राप्त प्रशिक्षुओं को भुगतना पड़ रहा है। जिन्होंने टेट में रात-दिन मेहनत करके मेरिट हासिल की है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि अगर सरकार 700 पदों की भर्ती को टेट मेरिट से नहीं भरकर उसे रद्द करके नए नियम लागू करती है तो ये उनके साथ अन्याय होगा। टेट मेरिट प्रशिक्षुओं में अमित शर्मा, शिव, राज, मुकेश, तीर्थ राम, अमित ठाकुर, पवन, संजू राणा, संतोष, धीरज, मुनीश, संजीव, सुमन, अजय, अंकित, अजय, हेम, संदीप, शक्ति, राजेश, सुनीता, दीपक, रोमा, वंदना, गगन, इक्का सिंह, साक्षी, सोनू, रवि, नितिका, पिंटू राणा, पूजा चंदेल, ज्योति, शेखर और अन्यों प्रशिक्षुओं ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों और नियमों का खामियाजा उन टेट मेरिट प्राप्त प्रशिक्षुओं को भुगतना पड़ेगा जो 2013 से टेट मेरिट लेकर अब नियुक्तियों के इंतजार में हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल कोर्ट के अलग-अलग फैसलों से भी यह टेट मेरिट प्राप्त प्रशिक्षु मानसिक रूप से परेशान हैं। ट्रिब्यूनल कोर्ट ने 11 जनवरी 2018 को टेट मेरिट नियुक्तियों को हरी झंडी दी है। दूसरी ओर हाईकोर्ट में इससे संबंधित 8 मई को सुनवाई रखी गई है। यह मामला लगभग 10 महीनों से न्यायालय लटका हुआ है। प्रशिक्षुओं का कहना है इसमें शामिल होने वाले एक-एक प्रशिक्षु का करीब 12 से 15 हजार रुपये खर्च हुआ है। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया 31 जुलाई 2017 को पूरी कर ली गई थी। पुराने नियमों को 30 अगस्त 2017 को निरस्त किया गया। नए नियम 22 सितंबर 2017 को बनाए गए। उन्हें राजपत्र में 29 सितंबर को शामिल किया गया। ऐसे में नए नियम पुरानी अधिसूचना पर लागू नहीं हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में यह स्पष्ट भी कर चुका है। इस आधार पर उच्च न्यायालय इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द नहीं कर सकता है। प्रशिक्षुओं ने कहा कि अगर यह भर्ती रद्द होती है तो जेबीटी प्रशिक्षु विरोध में आंदोलन करेंगे। अगर उनके साथ अन्याय किया गया तो जल्द ही इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने को विवश होंगे।

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