[unnao] - मौहारी में कमीशनबाजी की भेंट चढ़े शौचालय

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नवाबगंज। विकासखंड की ग्राम पंचायत आशाखेड़ा में शौचालय निर्माण में कमीशनबाजी का खेल ठंडा नहीं पड़ा था कि एक और गांव में शौचालय निर्माण में लाखों के घपले का मामला गर्माने लगा है। ब्लाक क्षेत्र के मौहारी गांव में एक साल पहले शौचालय निर्माण के लिए गड्ढे तो खोद दिए गए, शौचालय नहीं बनाए जा सके। कुछ जगह खामी छिपाने के लिए ढक्कन रखकर गड्ढों को ढक दिया गया है।

नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत मौहारी में शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार खुलनेे लगा है। एक वर्ष पहले शौचालय के लिए खोदे गए कई गड्ढे वैसे ही पड़े हैं। लंबा समय बीतने के बाद भी शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक वर्ष पहले शौचालय के गड्ढे पंचायतकर्मी ने खुदवा दिए थे। शौचालय नहीं बनवाए गए। इन्हें कागजों में पूर्ण दिखा दिया गया। गांव के विश्राम यादव, लालता प्रसाद, रामलखन, रामशंकर व हरी को शौचालय का लाभ देने के नाम पर सिर्फ गड्ढे ही खोदे गए। कुछ लाभार्थियों ने अनुदान लेने के बाद भी निर्माण नहीं करवाया। सचिव की मदद से कागजों पर शौचालयाें का निर्माण पूरा दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया। ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ियों की शिकायत उच्चाधिकारियों से कर जांच कराने की मांग की है। वहीं डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। अब मामला संज्ञान में आया है। सोमवार को टीम गांव भेजकर जांच कराई जाएगी। दोषियों पर कानूनी कार्रवाई के साथ ही निलंबन भी किया जाएगा।

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ज्यादातर ग्राम पंचायताें में गड़बड़ियां

जानकारों की मानें तो मौहारी और आशाखेड़ा की तरह ही विकासखंड की अधिकांश ग्राम पंचायतों में शौचालयों में गड़बड़ियां की गईं। प्रधान और सचिव की आपसी सेटिंग से शौचालयों के नाम पर मिलने वाली धनराशि का बंदरबांट किया जा रहा है। शौचालयों का निर्माण ठेके पर कराया जा रहा है। प्रधान और सचिव ट्रेडर्स की दुकान सेट किए हैं। उसी से शौचालय व आवास निर्माण के लिए सामग्री पहुंचाई जाती है। ब्लाक सूत्रों की मानें तो विकासखंड के एक जनप्रतिनिधि का प्रधान और सचिवों को संरक्षण प्राप्त है। इसी से जिला प्रशासन ग्राम पंचायतों की रैंडम जांच कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

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