[agra] - गिरिराज तलहटी में उमड़ेगा भक्ति का सैलाब

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राधाकुंड (मथुरा)। गिरिराज तलहटी में अधिक मास के कारण पूरे महीने श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ेगा। परिक्रमा लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए इस मास में देश के कोने-कोने से भक्तजन आएंगे। तलहटी के मंदिरों में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।अमावस्या से शुरू होने वाला अधिक मास भगवान विष्णु को सबसे अधिक प्रिय है। इसीलिए इसको पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाला अधिक मास इस बार 16 मई से शुरू हो रहा है। अधिक मास में गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा में भक्ति की धारा बहेगी। लोग श्रद्धा भक्ति से अपने इष्ट गिरिराज जी की परिक्रमा लगा कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।भक्तों का विश्वास है कि अधिक मास में गिरिराज महाराज की उपासना करने से लोगों को कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस बार 16 मई से शुरू होने वाला अधिक मास 15 जून तक चलेगा। राधाकुंड निवासी ज्योतिषाचार्य ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया इस मास में मांगलिक कार्य, विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं होते हैं। इसमें केवल धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना गया है। अधिक मास में लोगों को सादगी से रहना चाहिए। सादा भोजन व जमीन पर सोना चाहिए।अधिक मास के संबंध में भागवत में स्पष्ट लिखा है कि हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान ने इस मास को पैदा किया था, क्योंकि हिरण्यकश्यप राक्षस ने वरदान प्राप्त कर लिया था कि वह वर्ष के किसी भी माह में न मरे। इसके अलावा न धरती पर मरे और न आकाश में। रात में मरे न दिन में तथा घर के बाहर मरे न घर के भीतर आदि वरदान प्राप्त कर वह अपने आप को भगवान कहने लगा और भक्तों पर अत्याचार करने लगा। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए इस मास की उत्पत्ति की, जिससे राक्षस को मारा जा सके। भगवान विष्णु ने नृसिंह का रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया। ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया ज्योतिष के अनुसार जिस महीने में अमावस से दूसरी पड़ने वाली कोई संक्रांति न पड़े, वही अधिक मास कहलाता है।

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