[aligarh] - अभिभावक एवं परीक्षार्थियों के मददगार बने एएमयू छात्र

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।बीटेक एवं बीआर्क की प्रवेश परीक्षा के दौरान दूर-दूर से आने वाले परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों की मददगार एएमयू कें छात्र एवं कर्मचारी बने। 12 दिन से बंद न सिर्फ बाब-ए-सैयद आम लोगों के लिए खोल दिया, बल्कि शर्बत, पानी आदि वितरित कर परीक्षा केंद्र तक उन्हें पहुंचाने में मददगार भी बने।एएमयू में 12 दिन से चल रहे धरना-प्रदर्शन एवं हंगामे के कारण दूर-दूर से आने वाले परीक्षार्थी एवं उनके अभिभावक आशंकित थे। एक दिन पहले तक लोग फोन कर परीक्षा होगी या नहीं, इसकी जानकारी लेते रहे। उन्हें धरना-प्रदर्शन का असर परीक्षा पर पड़ने की आशंका थी, लेकिन एएमयू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बीटेक प्रवेश परीक्षा में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे। परीक्षार्थियों की हर संभव मदद करेंगे। परीक्षार्थी एवं अभिभावक हमारे हिस्से हैं। इसके साथ ही 12 दिन से बंद बाब-ए-सैयद को परीक्षार्थी एवं उनके अभिभावकों के लिए खोल दिया जाएगा। इससे संबंधित खबर अमर उजाला के शनिवार के अंक में प्रकाशित की थी। हुआ भी यही। एएमयू के पांच छात्र-छात्राएं बाब-ए-सैयद पर भूख हड़ताल पर बैठे रहे, लेकिन बाब-ए-सैयद के दरवाजे खोल देने से किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। एएमयू एनएसएस के स्वयं सेवक रेलवे स्टेशन से लेकर कैंपस तक में कई स्थानों पर सहायता शिविर लगाए थे। वह पानी, शर्बत के साथ-साथ परीक्षार्थियों को केंद्र तक पहुंचाने में मदद भी कर रहे थे। कुलपति की पत्नी डॉ. हामिदा तारिक एनएसएस के सहायता शिविर पर स्वयं पहुंची। समन्वयक प्रो. एम मसरूर आलम, डॉ. आदिल राजा, मोहसिन जफर खान, जेबा रिजवी, शोध छात्र मोमिन, मुकेश आदि मौजूद थे। ज्वाइंट एक्शन कमेटी द्वारा स्टाफ क्लब चौराहे पर शिविर का आयोजन किया गया था। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन के नेतृत्व में महिला एवं पुरुष परीक्षार्थियों को ठहरने के लिए अलग-अलग इंतजाम कराए गए थे। बुलंदशहर से आए नाहर सिंह ने कहा कि यहां आने से पहले बेहद चिंतित थे, लेकिन यहां किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। छात्र कई तरह से परीक्षार्थी एवं उनके अभिभावकों की मदद कर रहे थे।

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