[allahabad] - सीबीआई के निशाने पर बिना नाम वाले परिणाम

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सीबीआई के निशाने पर बिना नाम के जारी परीक्षा परिणाम0 नौ हजार पदों पर भर्ती के बाद केवल रोल नंबर किए गए सार्वजनिक0 सीबीआई ने की अफसरों से पूछताछ पर नहीं मिल सका उचित जवाबअमर उजाला ब्यूरोइलाहाबाद।उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में नौ हजार से अधिक पदों के परिणाम बिना नाम के जारी किए गए। परिणाम में अभ्यर्थियों के केवल रोल नंबर सार्वजनिक किए गए। अगर सबकुछ पारदर्शी तरीके से चल रहा था तो आयोग ने चयनितों के नाम क्यों छिपाए? सीबीआई के लिए भी यह बड़ा सवाल है और अफसरों से इस मामले में भी पूछताछ की गई है। हालांकि किसी भी अफसर ने इसका संतोषजनक जवाब नहीं किया। सीबीआई अब इन परीक्षाओं के दस्तावेज अपने कब्जे में ले चुकी है और इनकी जांच कर रही है।आयोग की ओर से अक्तूबर 2013 में प्रस्ताव लाया गया था कि परिणाम में चयनित अभ्यर्थी की जाति और वर्ग का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इसके बाद 20 अप्रैल 2015 को प्रस्ताव लाया गया कि परिणाम में नाम का उल्लेख भी नहीं किया जाएगा। केवल रोल नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। 11 अगस्त 2015 को पीसीएस-2014 का परिणाम जारी किया गया। कुल 579 पदों के लिए जारी परिणाम में अभ्यर्थियों के नाम छिपा लिए गए थे। इनमें 42 पद एसडीएम और 92 पद डिप्टी एसपी के थे। इसी तरह आरओ/एआरओ 2013 की परीक्षा का परिणाम सात अगस्त 2015 को जारी हुआ। इसके तहत कुल 505 पदों के लिए चयनित किए गए अभ्यर्थियों के नाम छिपा लिए गए। इसमें सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के भी 414 पद शामिल थे।इसके बाद आयोग ने दो मई 2015 को राजस्व निरीक्षक के 517 पदों का परिणाम जारी किया। वहीं, 21 मई 2015 को कृषि तकनीकी सहायक ग्रुप-सी के 6628 पदों का परिणाम घोषित किया। इन दोनों परीक्षा परिणामों में भी चयनित अभ्यर्थियों के केवल रोल नंबर सार्वजनिक किए गए। इसके अलावा सीधी भर्ती के तहत भी तकरीबन एक हजार पदों के परिणाम रोल नंबर के आधार पर जारी किए गए। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने आयोग के अफसरों से पूछताछ के दौरान यह जानना चाहा कि आयोग ने यह निर्णय क्यों लिया था लेकिन किसी के पास जवाब नहीं था। कुछ अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि जिन अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो रहा था, वे चयनितों के नाम को लेकर सवाल उठा रहे थे लेकिन सीबीआई के अफसर इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। सीबीआई ने इन परीक्षाओं की कॉपियों अपने कब्जे में ले ली हैं।00अनिल यादव के जाते ही वापस हो गया था प्रस्ताव0 आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में यह प्रस्ताव लाया गया था कि परिणाम के साथ केवल रोल नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। इन परीक्षाओं के दौरान आयोग पर लगातार आरोप लगते रहे कि इस प्रस्ताव की आड़ में आयोग जाति विशेष के अभ्यर्थियों का गलत तरीके से चयन कर रहा है। हालांकि पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के जाते ही आयोग ने यह प्रस्ताव वापस ले लिया था। 00पारदिर्शता पर लगतार उठते रहे सवाल0 परिणाम में नाम छिपाए जाने के प्रस्ताव से परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। तमाम आपत्तियां आईं। हंगामा भी हुआ लेकिन कई परीक्षा परिणाम इस प्रस्ताव के तहत जारी कर दिए गए।

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